
International News: पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते के बाद जहां युद्ध विराम और कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जगी थी, वहीं अब इजरायल की ओर से दक्षिणी लेबनान में किए गए ताजा सैन्य हमलों ने पूरे क्षेत्र को फिर से अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। लगातार बमबारी और बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने जिनेवा में प्रस्तावित वार्ता को फिलहाल रोक दिया है, जिससे शांति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दक्षिणी लेबनान में रातभर हमले, कई लोगों की मौत
रिपोर्टों के अनुसार इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में देर रात से लगातार हवाई और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में अब तक कम से कम 18 लोगों की मौत और 33 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। लेबनान के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी है, जबकि स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
चार इजरायली सैनिकों की भी मौत
संघर्ष के दौरान इजरायली सेना ने भी अपने चार सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि लेबनान सीमा पर भीषण गोलीबारी और जवाबी कार्रवाई के बीच यह नुकसान हुआ। इससे साफ है कि सीमा पर हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है।
जिनेवा वार्ता टली, शांति प्रक्रिया पर असर
अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में प्रस्तावित अहम बातचीत फिलहाल टाल दी गई है। जानकारी के मुताबिक लेबनान में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण ईरान ने अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने में देरी की है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के संभावित दौरे को लेकर भी फिलहाल कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है।
111 दिनों की जंग के बाद बनी थी समझौते की उम्मीद
इस वर्ष 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया को हिला दिया था। लंबे सैन्य टकराव और भारी जनहानि के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौते की दिशा में प्रगति हुई थी, जिससे क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद जगी थी। लेकिन लेबनान में जारी नई सैन्य कार्रवाई ने उस उम्मीद को फिर अनिश्चितता के घेरे में ला खड़ा किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, लेकिन नई चिंता बरकरार
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है। शुरुआती 60 दिनों तक सुरक्षित और शुल्क-मुक्त मार्ग का आश्वासन दिया गया है, लेकिन भविष्य में संभावित टोल व्यवस्था और समुद्री प्रशासन को लेकर वैश्विक शिपिंग कंपनियों और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
क्या फिर बढ़ेगा युद्ध का दायरा?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रहती है और कूटनीतिक वार्ताएं आगे नहीं बढ़ पातीं, तो अमेरिका-ईरान के बीच बनी शांति प्रक्रिया कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में पूरे पश्चिम एशिया में एक बार फिर व्यापक अस्थिरता और नए सैन्य टकराव का खतरा बढ़ सकता है।
Written By: Ekta Verma



