West Bengal: काकोली घोष के साथ खड़े 19 TMC सांसदों की लिस्ट जारी, शत्रुघ्न सिन्हा का नाम नहीं

तृणमूल कांग्रेस में जारी सियासी संकट के बीच काकोली घोष दस्तीदार के समर्थन में खड़े 19 सांसदों की सूची सामने आई है। बागियों की सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं, लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा का नाम नदारद है।

West Bengal: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकटों में से एक का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है और सांसदों के एक बड़े समूह के बगावती तेवरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बयान से हुई थी। उन्होंने दावा किया था कि पार्टी के 20 सांसद उनके साथ हैं और सभी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा है। इस दावे के बाद से बंगाल की राजनीति में हलचल मची हुई है।

अब इस मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, 20 में से 19 सांसदों की सूची सामने आई है, जिन्होंने कथित तौर पर 18 मई को लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय को अपने नाम भेजे थे। इस सूची में कई चर्चित और प्रभावशाली सांसदों के नाम शामिल हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिन नामों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही थी, उनमें से एक शत्रुघ्न सिन्हा का नाम इस नई सूची में शामिल नहीं है। इससे उनके रुख को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि इससे पहले उनके भी बागी खेमे में शामिल होने के दावे किए जा रहे थे।

काकोली घोष के समर्थन में बताए जा रहे 19 सांसद

  1. काकोली घोष दस्तीदार
  2. शताब्दी रॉय
  3. बापी हलदार
  4. डॉ. शर्मिला सरकार
  5. प्रसून बंद्योपाध्याय
  6. जगदीश बर्मा बसुनिया
  7. असित कुमार मल
  8. अरूप चक्रवर्ती
  9. रचना बनर्जी
  10. सायोनी घोष
  11. खलीलुर रहमान
  12. अबू ताहिर खान
  13. यूसुफ पठान
  14. मिताली बाग
  15. माला रॉय
  16. कालीपद सोरेन
  17. दीपक अधिकारी
  18. जून मालिया
  19. पार्थ भौमिक

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इस सूची के सामने आने के बाद टीएमसी के भीतर जारी खींचतान और अधिक स्पष्ट हो गई है। यदि काकोली घोष का दावा सही साबित होता है और सांसदों का यह समूह औपचारिक रूप से अलग रुख अपनाता है, तो यह ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।

फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से इस सूची को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में टीएमसी की अंदरूनी राजनीति और अधिक गरमा सकती है, जिसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति पर भी पड़ सकता है।

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