
UP Politics: अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। इस विवाद पर सुभासपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अदिति यादव के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि “अदिति यादव मेरी भी बेटी है” और किसी भी महिला के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने समाजवादी पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं पर भी निशाना साधा। राजभर ने दावा किया कि इस तरह की हरकतों के पीछे भी किसी सपाई के होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सपा नेताओं और समर्थकों को आत्ममंथन करने की जरूरत है और अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।
राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के कुछ समर्थक अक्सर राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा और व्यक्तिगत टिप्पणियों का सहारा लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं और उनका परिवार लंबे समय से ऐसी गतिविधियों का सामना करते रहे हैं।
अपने बयान में उन्होंने अखिलेश यादव पर भी तंज कसते हुए कहा कि राजनीति में मर्यादा और जिम्मेदारी बनाए रखना सभी नेताओं की जिम्मेदारी है। राजभर ने यह भी कहा कि महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है।
दरअसल, 9 जून को सोशल मीडिया पर एक कथित फर्जी और आपत्तिजनक पोस्ट वायरल हुई थी, जिसमें समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव के बारे में भ्रामक दावे किए गए थे। आरोप है कि पोस्ट के साथ एक एडिटेड तस्वीर भी साझा की गई थी, जिसका उद्देश्य उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना था।
इस मामले में कानपुर साइबर क्राइम थाने में FIR दर्ज कराई गई है। शिकायत के आधार पर भारत कुमार पटेल, नागेश्वर सिंह बघेल और विनोद कुमार यादव को नामजद किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 79, 336(4) और आईटी एक्ट की धारा 66E के तहत मामला दर्ज किया गया है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट की वास्तविकता तथा इसके पीछे शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।



