
Sports News: भारतीय शतरंज के युवा सितारे और ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानंद ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। 20 वर्षीय प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस 2026 टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया है। वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।
टूर्नामेंट के अंतिम राउंड में प्रज्ञानंद ने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इस जीत के साथ उन्होंने विश्व शतरंज में भारत का परचम एक बार फिर बुलंद कर दिया।
कठिन परिस्थितियों से की शानदार वापसी
नॉर्वे चेस 2026 के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब प्रज्ञानंद खिताब की दौड़ में पिछड़ते नजर आ रहे थे। टूर्नामेंट के मध्य चरण में वह शीर्ष खिलाड़ियों से पीछे चल रहे थे और उनकी राह आसान नहीं दिखाई दे रही थी।
हालांकि भारतीय ग्रैंडमास्टर ने हार नहीं मानी। दबाव के बीच उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार जीत दर्ज की और खिताब की दौड़ में दमदार वापसी की।
मैग्नस कार्लसन पर रहा दबदबा
इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि प्रज्ञानंद ने दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और नॉर्वे के दिग्गज ग्रैंडमास्टर मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबलों में दो बार हराया।
भारतीय शतरंज इतिहास में विश्वनाथन आनंद के बाद प्रज्ञानंद दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार मात दी है। यह उपलब्धि उनकी प्रतिभा और मानसिक मजबूती को दर्शाती है।
दिग्गज खिलाड़ियों को हराकर जीता खिताब
नॉर्वे चेस 2026 में दुनिया के कई शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा ले रहे थे। इनमें मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश, अलीरेजा फिरोजा, वेस्ली सो, मैग्नस कार्लसन और विन्सेंट कीमर जैसे बड़े नाम शामिल थे।
प्रज्ञानंद ने टूर्नामेंट के दौरान अलीरेजा फिरोजा, डी गुकेश और मैग्नस कार्लसन जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के खिलाफ महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। खासकर नौवें राउंड में डी गुकेश पर मिली जीत ने उन्हें खिताब की दौड़ में वापस ला खड़ा किया।
लगातार पांच क्लासिकल जीत से बने चैंपियन
प्रज्ञानंद ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार लय बनाए रखी। उन्होंने कुल पांच क्लासिकल मुकाबलों में जीत हासिल की और लगातार चार क्लासिकल जीत दर्ज कर खिताब की नींव रखी।
अंतिम राउंड में विन्सेंट कीमर को हराने के बाद उन्होंने नॉर्वे चेस 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया और भारतीय शतरंज इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।
भारतीय शतरंज के लिए बड़ी उपलब्धि
आर प्रज्ञानंद की यह जीत केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय शतरंज के लिए भी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने विश्व शतरंज में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है और प्रज्ञानंद की यह उपलब्धि उसी सफलता की एक और बड़ी कड़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में प्रज्ञानंद विश्व शतरंज के सबसे बड़े खिलाड़ियों में शामिल हो सकते हैं।
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Written By: Ekta Verma



