ज्योतिर्मठ से हटेंगे नकली शंकराचार्य, संतों की सहमति से होगा नए पीठाधीश्वर का होगा चयन: आशुतोष ब्रह्मचारी

Fake Shankaracharya will be removed from Jyotirmath, new Peethadheeshwar will be selected with the consent of saints: Ashutosh Brahmachari

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर बटुकों के यौन शोषण का आरोप लगाकर चर्चाओं में आए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में ज्योतिर्मठ पीठ और उसके वर्तमान नेतृत्व को लेकर तीखे बयान दिए। उन्होंने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ‘कलनेमि बताते हुए उनके गुरु ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को भी ‘नकली शंकराचार्य बताया। इसके साथ ही उन्होंने गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना ‘चाचा गुरु बताया। प्रेस वार्ता के दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपनी प्रस्तावित ‘सनातन यात्रा पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह यात्रा संत समाज और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से निकाली जाएगी। यात्रा को भव्य स्वरूप देने के लिए वे देशभर का भ्रमण कर रहे हैं और प्रत्येक संत से मात्र एक-एक रुपए का सहयोग प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल धन संग्रह का माध्यम नहीं, बल्कि संत समाज को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है। उनके अनुसार देश के विभिन्न राज्यों में संतों और धार्मिक संस्थाओं से संवाद स्थापित किया जा रहा है, ताकि सनातन संस्कृति और परंपराओं को मजबूत आधार मिल सके।
ज्योतिर्मठ में होगा नए शंकराचार्य का चयन
आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि ज्योतिर्मठ पीठ पर वर्तमान व्यवस्था में बदलाव का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि अब इस पीठ पर किसी नए और योग्य शंकराचार्य का चयन किया जाएगा, जिसे संत समाज और 13 अखाड़ों की सहमति प्राप्त होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में पीठ की प्रतिष्ठा और परंपराओं को नुकसान पहुंचा है, इसलिए संत समाज मिलकर एक नई व्यवस्था स्थापित करने पर विचार कर रहा है। हालांकि उन्होंने किसी संभावित नाम का खुलासा नहीं किया।
मैं शंकराचार्य नहीं, कानूनी संत हूं
प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वे स्वयं को भविष्य में शंकराचार्य के रूप में देख रहे हैं या शंकराचार्य के प्रतिनिधि के तौर पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, तो उन्होंने इस संभावना से साफ इनकार कर दिया।आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा, ‘मेरे अंदर शंकराचार्य बनने की योग्यता नहीं है। मैं स्वयं को एक कानूनी संत मानता हूं। मेरा कार्य संतों के अधिकारों की रक्षा करना, उनके लिए कानूनी लड़ाइयां लड़ना और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि संत समाज की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है। इसी भावना के साथ वे विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं।
बयानों से फिर गरमा सकता है संत समाज
आशुतोष ब्रह्मचारी के इन बयानों के बाद संत समाज और धार्मिक संगठनों के बीच नई चर्चाओं का दौर शुरू हो सकता है। खासकर ज्योतिर्मठ पीठ, शंकराचार्य परंपरा और नए नेतृत्व के चयन को लेकर दिए गए उनके वक्तव्यों से धार्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल बढ़ सकती है। वहीं, उनकी प्रस्तावित सनातन यात्रा को लेकर भी संत समाज में उत्सुकता देखी जा रही है। अब आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अन्य संतों और अखाड़ों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

रिपोर्ट : आकाश त्रिपाठी

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