स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में डॉक्टरों और वकीलों के बीच हुए विवाद के बाद एक बार फिर मामला गरमा गया है। जहां एक ओर अस्पताल प्रशासन ने घटना के बाद तत्काल प्रभाव से 20 रेजिडेंट डॉक्टरों को निलंबित कर दिया था, वहीं दूसरी ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने पांच वकीलों को निष्कासित कर दिया था। दोनों पक्षों पर कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक माहौल शांत रहा, लेकिन अब निष्कासित वकीलों ने नया मोर्चा खोल दिया है।
मंगलवार से शुरू है अमरण अनशन
बार एसोसिएशन से निष्कासित किए गए वकीलों ने मंगलवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया। शुरुआत में वकील डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के पास धरने पर बैठे रहे। मंगलवार से लेकर शुक्रवार सुबह तक उन्होंने वहीं पर अमरण अनशन जारी रखा। हालांकि इस दौरान उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। इसके बाद शुक्रवार रात से निष्कासित वकील एसआरएन अस्पताल के प्रशासनिक विंग के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए, यह अनशन शनिवार को भी जारी रहा। निष्कासित वकीलों के पक्ष में प्रशासनिक भवन के सम्मुख अमरण अनशन पर बैठे वकीलों में रितेश श्रीवास्तव का कहना है कि जिस तरह इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने पांचों निष्कासित वकीलों के नाम सार्वजनिक किए थे, उसी प्रकार अस्पताल प्रशासन को भी निलंबित किए गए 20 रेजिडेंट डॉक्टरों के नाम उजागर करने चाहिए। उनका आरोप है कि कार्यवाही दोनों पक्षों पर हुई है, इसलिए पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डॉक्टरों की पहचान भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
वकीलों की मांग मानने से साफ किया इंकार
वकीलों का कहना है कि बार एसोसिएशन ने जिन अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की, उनके नाम सार्वजनिक रूप से घोषित किए गए। ऐसे में अस्पताल प्रशासन डॉक्टरों के नाम छिपाकर दोहरा रवैया अपना रहा है। उनका कहना है कि जब तक निलंबित डॉक्टरों की सूची सार्वजनिक नहीं की जाती, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। उधर अस्पताल प्रशासन ने वकीलों की इस मांग को फिलहाल मानने से इनकार कर दिया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जांच पूरी होने से पहले किसी भी डॉक्टर को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। प्रशासन के अनुसार घटना की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है और अंतिम निर्णय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।
रिपोर्ट आने के बाद ही सार्वजनिक होगा नाम
अस्पताल प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि जांच पूरी होने और दोष तय होने के बाद ही संबंधित डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे। इससे पहले किसी भी चिकित्सक की पहचान उजागर करना उचित नहीं होगा। प्रशासन का तर्क है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चल रही है तथा रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जिन पांच वकीलों को निष्कासित किया था, उनमें रितेश श्रीवास्तव, दीपक शुक्लाा, अनुज कुमार सेन, विवेक पाल और के.के. यादव सहित कुल पांच अधिवक्ता शामिल हैं। इन वकीलों के खिलाफ संगठनात्मक अनुशासनहीनता और विवाद से जुड़े आरोपों के आधार पर कार्रवाई की गई थी।

निष्पक्षता के लिए जरूरी है नामों को सार्वजनिक करना
इधर अनशन स्थल पर बैठे वकीलों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन यदि वास्तव में निष्पक्षता बरतना चाहता है तो उसे निलंबित डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक करने चाहिए। उनका आरोप है कि एक पक्ष की पहचान उजागर कर दी गई जबकि दूसरे पक्ष को संरक्षण दिया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी है। एसआरएन अस्पताल के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार वर्मा ने बताया कि निलंबित किए गए सभी 20 रेजिडेंट डॉक्टरों को एसआईसी में अटैच कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि निलंबन अवधि के दौरान इन डॉक्टरों को नियमित कक्षाएं करने की अनुमति नहीं दी गई है। साथ ही जांच पूरी होने तक उनके खिलाफ निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रहेगी। फिलहाल डॉक्टर-वकील विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। एक ओर निष्कासित वकील अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन पर डटे हुए हैं, तो दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन जांच पूरी होने तक किसी भी डॉक्टर का नाम सार्वजनिक करने से इनकार कर रहा है। ऐसे में अब सभी की नजरें जांच समिति की रिपोर्ट और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

बिना जाँच रिपोर्ट आए किसी भी डॉक्टर का नाम सार्वजनिक करना नियमों के खिलाफ है। जब तक जाँच समिति की रिपोर्ट नहीं आती है, तब तक किसी भी डॉक्टर को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। वकीलों की मांग बिल्कुल भी जायज नहीं है। बिना जाँच रिपोर्ट किसी का नाम सार्वजनिक करने से उस डॉक्टर के करियर बुरा असर पड़ सकता है। लिहाजा रिपोर्ट आने तक रेजीडेंट डॉक्टरों को एसआईसी में अटैच करने के साथ साथ ही क्लास लेने की अनुमति नहीं दी गई है।
डॉ. अजय कुमार वर्मा
प्राचार्य स्वरूपरानी अस्पताल
स्वरूप रानी प्रशासन जब तक निलंबित डॉक्टरों का नाम सार्वजनिक नहीं करेगा तब यह आमरण अनशन इसी तरह चलता रहेगा। चाहे मुझे कुछ भी हो जाए मैं अमरण अनशन जारी रखूंगा। मंगलवार की सुबह से हाई कोर्ट स्थित भीम राओ अंबेडकर की मूर्ती के पास से अनशन शुरू हुआ, लेकिन जब वहां कोई समाधान होता नहीं दिखा, तो शुक्रवार की रात से अस्पताल के प्रशासनिक भवन के सम्मुख अमरण अनशन चालू है।
ऋतेश श्रीवास्तव
वकील
रिपोर्ट : आकाश त्रिपाठी



