
बस्तर। केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में बड़ा ऐलान करते हुए ‘सेवा डेरा’ अभियान की शुरुआत की। इसके तहत अर्धसैनिक बलों के सुरक्षा कैंपों को अब सेवा केंद्रों में बदला जाएगा, ताकि आदिवासी इलाकों में लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
बस्तर के नेतानार में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने एक सुरक्षा कैंप को औपचारिक रूप से सेवा कैंप में तब्दील किया। उन्होंने कहा कि यह कदम छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने और विकास की नई शुरुआत का प्रतीक है। शाह ने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सली हिंसा होती थी, वहां अब जनसेवा और विकास के केंद्र बनाए जा रहे हैं।
गृहमंत्री ने कहा कि उनके लिए यह दिन ऐतिहासिक है, क्योंकि शहीद वीर गुंडाधुर की प्रेरणा से यह पहल शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर कभी छह जवान शहीद हुए थे, वहीं अब आदिवासियों के लिए सेवा केंद्र खोला गया है।
अमित शाह ने बस्तर में नक्सल हिंसा के दौर को याद करते हुए कहा कि पहले आईईडी धमाकों में लोगों के अंग तक चले जाते थे और बच्चों को स्कूल से उठा लिया जाता था। उन्होंने कहा कि आज केंद्र सरकार की योजनाएं गांव-गांव तक पहुंच रही हैं। लोगों को मुफ्त राशन, पांच लाख रुपये तक का इलाज और अन्य सुविधाएं मिल रही हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार की सराहना करते हुए कहा कि आदिवासियों के नाम पर अशांति फैलाने वालों को सुरक्षाबलों ने करारा जवाब दिया है। शाह ने बताया कि करीब तीन हजार नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जिनमें से 200 लोग ऐसे हैं जिन्हें पढ़ना-लिखना भी नहीं आता था। उन्होंने कहा कि आरएसएस की मदद से दो हजार लोगों को प्रौढ़ शिक्षा दी जा रही है।
गृहमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले एक साल में बस्तर के गांवों तक रायपुर जैसी सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी। उन्होंने घोषणा की कि बस्तर के 200 में से 70 सुरक्षा कैंपों को जनसुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।



