
Pakistan News: अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ती निगरानी के बावजूद ईरान से पाकिस्तान तक बड़े पैमाने पर ईंधन तस्करी का नेटवर्क लगातार सक्रिय बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 60 लाख लीटर पेट्रोल और डीजल अवैध रूप से पाकिस्तान पहुंचाया जा रहा है। यह तस्करी केवल सीमा पार अवैध कारोबार नहीं रह गई है, बल्कि अब यह दोनों देशों की आर्थिक जरूरतों और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
ईरान कई वर्षों से आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसके तेल निर्यात पर भारी असर पड़ा है। ऐसे में पाकिस्तान के रास्ते होने वाली यह तस्करी ईरान के लिए विदेशी मुद्रा और आर्थिक राहत का एक अहम जरिया बन गई है। दूसरी तरफ पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई, ईंधन की कमी और ऊंची कीमतों के बीच यह सस्ता ईंधन लोगों और स्थानीय कारोबारियों के लिए राहत का साधन बन रहा है।
ईरान और पाकिस्तान के बीच लगभग 900 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसका बड़ा हिस्सा बलूचिस्तान क्षेत्र से गुजरता है। यह इलाका लंबे समय से सुरक्षा और निगरानी की चुनौतियों से जूझता रहा है। इसी कमजोर निगरानी का फायदा उठाकर तस्कर ईंधन को छोटे-छोटे कनस्तरों में भरकर पिकअप ट्रकों, मोटरसाइकिलों और अन्य वाहनों के जरिए सीमा पार पहुंचाते हैं। जानकारी के मुताबिक एक पिकअप वाहन में करीब 1800 लीटर तक ईंधन ले जाया जा सकता है।
केवल सड़क मार्ग ही नहीं, बल्कि समुद्री रास्तों का भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। छोटी नावों और मछली पकड़ने वाली बोट्स के जरिए ईंधन को ग्वादर पोर्ट और पाकिस्तान के अन्य तटीय इलाकों तक पहुंचाया जाता है। अनुमान है कि इस नेटवर्क में लगभग 2000 वाहन और 1300 से अधिक नावें शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अवैध कारोबार अब स्थानीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुका है। बलूचिस्तान जैसे पिछड़े और बेरोजगारी से प्रभावित क्षेत्रों में हजारों लोग इसी तस्करी नेटवर्क से अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। सीमावर्ती गांवों में कई परिवारों की आय का मुख्य स्रोत यही ईंधन कारोबार बन चुका है।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानी IRGC इस पूरे नेटवर्क की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। तस्करी के जरिए ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार कर अपने तेल को बाजार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
वहीं अमेरिका लगातार इस तस्करी को रोकने के लिए दबाव बना रहा है। अप्रैल 2026 से अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी और निगरानी को और सख्त किया है। इसके बावजूद सीमा की लंबाई, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और स्थानीय समर्थन के कारण इस तस्करी को पूरी तरह रोकना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने भी पिछले कुछ वर्षों में इस अवैध कारोबार को रोकने के प्रयास किए हैं। 2024 में तस्करी में कुछ कमी देखने को मिली थी, लेकिन हालिया महीनों में इसके फिर से बढ़ने के संकेत सामने आए हैं। स्थानीय प्रशासन और प्रांतीय सरकारों पर भी तस्करी रोकने में कमजोर कार्रवाई के आरोप लगते रहे हैं।
आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो इस अवैध ईंधन कारोबार की वार्षिक कीमत 1 अरब डॉलर से अधिक बताई जा रही है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान की कुल वार्षिक ईंधन खपत का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा इसी तस्करी वाले ईंधन से पूरा होने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक बलूचिस्तान और सीमावर्ती इलाकों में रोजगार, विकास और वैकल्पिक आय के साधन नहीं बढ़ाए जाएंगे, तब तक इस तस्करी नेटवर्क को खत्म करना आसान नहीं होगा। यह मामला अब केवल अवैध व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति, आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव से जुड़ा एक जटिल मुद्दा बन चुका है।



