
मई और जून की तेज गर्मी में ज्यादातर लोग राहत के लिए कूलर का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि कई बार कूलर चलने के बावजूद कमरा ठंडा नहीं होता। इसके बजाय कमरे में उमस, भारीपन और चिपचिपाहट महसूस होने लगती है।
अक्सर लोग समझते हैं कि कूलर खराब है या उसमें पानी कम है। लेकिन असली वजह कई छोटी गलतियां होती हैं, जो कूलिंग को खराब कर देती हैं।
पूरी तरह बंद कमरा रखना
बहुत से लोग कूलर चलाते समय कमरे की खिड़कियां और दरवाजे पूरी तरह बंद कर देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है।
कूलर एयर कंडीशनर की तरह काम नहीं करता। उसे बाहर की ताजी और सूखी हवा की जरूरत होती है। अगर कमरा पूरी तरह बंद रहेगा तो नमी अंदर ही जमा होती जाएगी। इससे कमरा और ज्यादा उमस भरा लगने लगेगा।
इसलिए कूलर चलाते समय एक खिड़की या दरवाजा थोड़ा खुला जरूर रखें।
कूलर को कमरे के अंदर रखना
कई लोग कूलर को कमरे के बीच या किसी कोने में रख देते हैं। इससे कूलर वही नम हवा बार-बार घुमाता रहता है।
बेहतर होगा कि कूलर को खिड़की या दरवाजे के पास रखें। इससे वह बाहर की हवा खींचकर बेहतर कूलिंग देगा।
हर समय वॉटर पंप चालू रखना
बारिश या ज्यादा उमस वाले मौसम में लगातार वॉटर पंप चलाना सही नहीं होता। इससे हवा में नमी और बढ़ जाती है।
ऐसे मौसम में कुछ देर के लिए केवल फैन मोड या स्विंग मोड चलाएं। इससे कमरे की चिपचिपाहट जल्दी कम होगी।
गंदे या पुराने पैड इस्तेमाल करना
अगर कूलर के पैड पुराने या गंदे हैं तो पानी सही तरीके से नहीं फैलता। इससे हवा ठंडी होने के बजाय भारी महसूस होती है।
गर्मी शुरू होने से पहले कूलर के पैड या हनीकॉम्ब फिल्टर बदल देना बेहतर रहता है।
कूलर की टंकी साफ न करना
कई लोग कूलर की टंकी लंबे समय तक साफ नहीं करते। पुराने पानी में बैक्टीरिया और फंगस बनने लगते हैं। यही गंदी हवा कमरे में फैलती है।
इसलिए हफ्ते में कम से कम एक बार कूलर की टंकी जरूर साफ करें और ताजा पानी भरें।
इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप सही वेंटिलेशन, साफ कूलर और सही इस्तेमाल का ध्यान रखेंगे तो बिना AC के भी कमरा काफी हद तक ठंडा रखा जा सकता है। छोटी-छोटी सावधानियां कूलर की कूलिंग को बेहतर बना सकती हैं।



