
International Updates: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक राजनीति अब समुद्र के रास्ते और भी जटिल होती जा रही है। एक ओर जहां डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों के चलते होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दुनिया में चिंता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर चीन ने भी बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए साउथ चाइना सी में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी है।
चीन ने विवादित समुद्री क्षेत्र स्कारबोरो शोल के एंट्री पॉइंट पर नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा कर दी है। यह कदम सीधे तौर पर फिलीपींस के साथ तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि यह इलाका लंबे समय से दोनों देशों के बीच विवाद का केंद्र रहा है।
समुद्र में चीन की नई रणनीति
हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन ने स्कारबोरो शोल के आसपास बड़ी संख्या में कोस्ट गार्ड जहाज, फिशिंग बोट्स और एक विशाल फ्लोटिंग बैरियर तैनात किया है। लगभग 350 मीटर लंबे इस बैरियर के जरिए इस क्षेत्र में आने-जाने का रास्ता सीमित कर दिया गया है।
इस कदम को चीन की “ग्रे ज़ोन” रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें बिना सीधे युद्ध के दबाव बनाकर अपने दावे मजबूत किए जाते हैं।
फिलीपींस के लिए क्यों अहम है यह इलाका?
स्कारबोरो शोल सिर्फ एक छोटा समुद्री क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह फिलीपींस के मछुआरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां बड़ी संख्या में मछलियां मिलती हैं, जिससे हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है।
फिलीपींस का दावा है कि यह इलाका उसके एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) के भीतर आता है, जबकि चीन इस पर अपना अधिकार जताता है। यही वजह है कि पिछले कई वर्षों से यह विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
टकराव की ओर बढ़ते कदम
चीन की इस कार्रवाई के बाद फिलीपींस ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उसने अपने कोस्ट गार्ड और नौसेना के जहाज इस क्षेत्र में तैनात कर दिए हैं। फिलीपींस का आरोप है कि चीन अपनी “मैरीटाइम मिलिशिया” के जरिए उसके मछुआरों को डराकर भगा रहा है।
यह स्थिति दोनों देशों के बीच सीधे टकराव की संभावना को बढ़ा रही है, जो पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।
अमेरिका की भूमिका और वैश्विक असर
इस पूरे मामले में अमेरिका फिलीपींस का समर्थन करता रहा है। हाल ही में अमेरिका और फिलीपींस ने संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किया था।
हालांकि, इस समय अमेरिका का फोकस मिडिल ईस्ट पर अधिक है, जिसका फायदा उठाकर चीन साउथ चाइना सी में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
पुराना विवाद, नया खतरा
गौरतलब है कि चीन 2012 से स्कारबोरो शोल पर नियंत्रण बनाए हुए है। वहीं 2016 में अंतरराष्ट्रीय अदालत ने फिलीपींस के पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया।
अब ताजा घटनाक्रम ने इस पुराने विवाद को एक बार फिर वैश्विक मंच पर ला खड़ा किया है, जिससे आने वाले समय में बड़े भू-राजनीतिक तनाव की आशंका बढ़ गई है।
Written By: Anushri Yadav



