प्रयागराज। केपीयूसी छात्रावास में बड़ी कार्रवाई, 57 कमरों से अवैध कब्जा हटाकर तालाबंदी

प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक बार फिर छात्रावासों में अनुशासन कायम करने के लिए सख्त कदम उठाया है। बुधवार को केपीयूसी छात्रावास में औचक छापेमारी कर 57 कमरों को अवैध कब्जे से मुक्त करा उनकी तालाबंदी कर दी गई। इससे पहले वर्ष 2024 में भी अभियान चला इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कई छात्रावासों को विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा कब्जा मुक्त कराया गया था, जिसमे केपीयूसी छात्रावास को भी कब्जामुक्त कराया गया था, लेकिन लापरवाही के चलते दोबारा अवैध कब्जे की स्थिति बन गई थी।

यह कार्रवाई अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. एन. के. शुक्ल और कुलानुशासक डॉ. अतुल नारायण सिंह के नेतृत्व में की गई। छात्रावास के वार्डन प्रो. संदीप आनंद को मिली शिकायतों और प्रारंभिक जांच के बाद यह कदम उठाया गया। जांच में सामने आया कि कई कमरों में अनधिकृत लोग रह रहे थे।

छापेमारी के दौरान कुल 84 कमरों की जांच की गई। इनमें से 57 कमरे ऐसे पाए गए, जिन पर बाहरी या अपात्र लोगों का कब्जा था। प्रशासन ने विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए सभी कमरों को खाली कराया और उन पर ताला लगा दिया, ताकि दोबारा कब्जा न हो सके। सूत्रों की जानकारी के अनुसार, केपीयूसी छात्रावास, जो के पी ट्रस्ट द्वारा संचालित है, पिछले कुछ समय से नियमित वार्डन के अभाव में अव्यवस्था का शिकार था।

हाल ही में प्रो. संदीप आनंद के वार्डन बनने के बाद व्यवस्था सुधारने की दिशा में तेजी आई है। यह छापेमारी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए स्थानीय पुलिस का पूरा सहयोग लिया गया। कर्नलगंज क्षेत्र के एसीपी के नेतृत्व में इंस्पेक्टर कर्नलगंज और शिवकुटी सहित भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मियों, प्रॉक्टोरियल बोर्ड और डीएसडब्ल्यू टीम ने मिलकर अभियान को सफल बनाया।

इस दौरान प्रो. एन. के. शुक्ल और डॉ. अतुल नारायण सिंह ने स्पष्ट कहा कि छात्रावास केवल पात्र विद्यार्थियों के लिए हैं। किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या नियमों के खिलाफ गतिविधियां बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रहितों की रक्षा और संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस तरह की कार्रवाई से विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकेत दिया है कि यह कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी। अन्य छात्रावासों में भी चरणबद्ध तरीके से औचक निरीक्षण और सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।

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प्रशासन का मानना है कि इस तरह की सख्ती से छात्रावासों में अनुशासन कायम होगा और वास्तविक छात्रों को रहने की सुविधा मिल सकेगी। 2024 की कार्रवाई के बाद दोबारा हुई यह सख्ती साफ संकेत देती है कि अब लापरवाही पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस पूरे अभियान को छात्रावासों की गरिमा बहाल करने और सुरक्षित, सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

रिपोर्ट: आकाश त्रिपाठी, प्रयागराज

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