
Women Health: महिलाओं के लिए पीरियड्स लीव यानी मासिक धर्म के दौरान छुट्टी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। भारत में इस विषय पर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों से कामकाजी महिलाओं को फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है। अदालत की टिप्पणी के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि दुनिया के अन्य देशों में इस विषय को किस तरह देखा और लागू किया गया है।
दरअसल, कई देश ऐसे हैं जहां महिलाओं को पीरियड्स के दौरान विशेष छुट्टी देने का प्रावधान पहले से मौजूद है। इंडोनेशिया में दशकों पहले से यह नियम लागू है, जहां महिला कर्मचारियों को हर महीने दो दिन की छुट्टी लेने का अधिकार है। जापान में भी लंबे समय से मासिक धर्म के दौरान अवकाश की व्यवस्था है, हालांकि इसका भुगतान करना या न करना कंपनियों के विवेक पर निर्भर करता है।
ताइवान ने जेंडर इक्वैलिटी के तहत महिलाओं को साल में सीमित दिनों की पीरियड लीव का प्रावधान दिया है, जबकि दक्षिण कोरिया में महिलाओं को एक दिन की छुट्टी मिलती है। खास बात यह है कि यदि कोई महिला इस अवकाश का उपयोग नहीं करती, तो कुछ कंपनियां अतिरिक्त भुगतान भी करती हैं।
अफ्रीकी देश जाम्बिया में यह सुविधा ‘मदर्स डे’ के नाम से जानी जाती है, जहां महिलाएं बिना औपचारिक सूचना के महीने में एक दिन की छुट्टी ले सकती हैं। वहीं वियतनाम में कामकाजी महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अतिरिक्त ब्रेक या कुछ दिनों की छुट्टी का विकल्प मिलता है। यूरोप में स्पेन ने हाल ही में इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए गंभीर दर्द या स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में महिलाओं को तीन से पांच दिन तक की छुट्टी देने का कानून बनाया है।
इस वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत में पीरियड्स लीव पर बहस जारी है। सवाल यह है कि क्या ऐसे प्रावधान महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेंगे या फिर कार्यस्थल पर नई चुनौतियां खड़ी करेंगे। आने वाले समय में यह मुद्दा नीति और समाज दोनों के स्तर पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।



