
Nepal Election 2026 : नेपाल में 5 मार्च को हुए आम चुनाव में राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदलता नजर आया। युवा नेता Balen Shah की पार्टी Rastriya Swatantra Party (RSP) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पारंपरिक दलों के कई दिग्गज नेताओं को चुनाव में पराजित कर दिया।
चुनाव परिणामों के अनुसार शाम तक घोषित 156 सीटों में से आरएसपी 120 सीटों पर जीत दर्ज कर दो-तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रही है। इस चुनाव में तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों में से केवल Pushpa Kamal Dahal ‘प्रचंड’ ही अपनी सीट बचाने में सफल रहे, जबकि अन्य वरिष्ठ नेताओं को हार का सामना करना पड़ा।
ओली को उनके गढ़ में मिली हार
इस चुनाव की सबसे बड़ी खबर यह रही कि आरएसपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार Balen Shah ने पूर्व प्रधानमंत्री और Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) के अध्यक्ष KP Sharma Oli को उनके मजबूत गढ़ झापा-5 में हरा दिया।
35 वर्षीय बालेन शाह को 68,348 वोट मिले, जबकि 74 वर्षीय ओली को 18,734 वोटों से संतोष करना पड़ा। वर्षों से इस सीट पर अपराजित रहे ओली की हार को नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
प्रचंड ने सुरक्षित सीट से दर्ज की जीत
वहीं पूर्व प्रधानमंत्री Pushpa Kamal Dahal प्रचंड ने इस बार रुकुम पूर्व से चुनाव लड़ा और अपनी सीट बचाने में सफल रहे। प्रचंड लंबे समय से अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने के लिए जाने जाते हैं।
चुनाव से पहले उन्होंने अपनी पार्टी Communist Party of Nepal (Maoist Centre) को भंग कर कई छोटी पार्टियों के साथ मिलकर नई Nepal Communist Party का गठन किया।
माधव नेपाल भी चुनाव हारे
एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री Madhav Kumar Nepal को भी हार का सामना करना पड़ा। वह रौतहट-1 सीट से आरएसपी के उम्मीदवार राजेश कुमार चौधरी से पराजित हो गए।
इसके अलावा कई बड़े नेताओं और प्रमुख दलों Nepali Congress और सीपीएन-यूएमएल के कई गढ़ों में भी आरएसपी ने जीत दर्ज की।
युवाओं के मुद्दों ने बदली राजनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में युवाओं की बड़ी भूमिका रही। भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान, सुशासन, भाई-भतीजावाद का अंत और राजनीति में नई पीढ़ी को मौका देने जैसे मुद्दों को लेकर ‘जेनरेशन-ज़ेड’ आंदोलन ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक राजनीतिक दल मतदाताओं की नई अपेक्षाओं को समझने में असफल रहे, जिसके कारण इस चुनाव में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।
नेपाल के इस चुनाव परिणाम को देश की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत माना जा रहा है।



