
Religion Update: हर साल की तरह इस बार भी होली की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बन गई थी। कहीं 3 मार्च की चर्चा थी तो कहीं 4 मार्च को रंग खेलने की बात कही जा रही थी। ज्योतिषाचार्यों और अलग-अलग पंचांगों के मतभेद के कारण भ्रम और बढ़ गया। लेकिन अब स्थिति साफ हो चुकी है और त्योहार की सही तिथियां तय हो गई हैं। कब है होलिका दहन? हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को पड़ रही है और इसी दिन शाम को शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाएगा। ध्यान रखने वाली बात यह है कि होलिका दहन हमेशा भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही किया जाता है। भद्रा काल को अशुभ माना जाता है, इसलिए उसके दौरान अग्नि प्रज्वलित नहीं की जाती। इस बार भद्रा का समय शाम तक रहेगा, जिसके बाद देर शाम या रात में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा। रंगों वाली होली कब खेली जाएगी? रंगों की होली यानी धुलेंडी अगले दिन मनाई जाती है। इसलिए इस साल रंगों का त्योहार 4 मार्च को मनाया जाएगा। 3 मार्च की रात होलिका दहन और 4 मार्च को पूरे देश में रंग, गुलाल और खुशियों की बारिश होगी।
इस तरह 3 मार्च को दहन और 4 मार्च को रंग खेलने की परंपरा इस बार भी निभाई जाएगी। चंद्र ग्रहण का क्या है मामला? इस साल होली के आसपास चंद्र ग्रहण की चर्चा भी जोरों पर है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई थी। हालांकि ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रहण का समय भारत में दिखाई देने वाला नहीं है या फिर वह ऐसा समय होगा जब उसका धार्मिक प्रभाव मान्य नहीं होगा। अगर ग्रहण का समय होलिका दहन या रंगों की होली से सीधे तौर पर नहीं टकराता, तो सामान्य रूप से त्योहार मनाने में कोई बाधा नहीं होती।

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फिर भी कुछ लोग परंपरागत मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ या भोजन से परहेज रखते हैं। क्यों होती है तारीख को लेकर उलझन? होली की तिथि तय करने में चंद्रमा की स्थिति और पूर्णिमा तिथि की गणना अहम भूमिका निभाती है। कभी-कभी पूर्णिमा दो दिनों में पड़ती है या भद्रा काल का समय बदल जाता है, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है। अलग-अलग पंचांगों की गणना पद्धति में हल्का अंतर भी तारीख को लेकर मतभेद पैदा कर देता है।
इसी वजह से इस साल भी सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर 3 और 4 मार्च को लेकर चर्चा चलती रही। लेकिन अब स्पष्ट है कि धार्मिक परंपरा के अनुसार 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगों की होली मनाई जाएगी। त्योहार का असली संदेश होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। होलिका दहन हमें यह संदेश देता है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है, जबकि प्रेम और आस्था की जीत होती है। 4 मार्च को जब लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, तो वह आपसी गिले-शिकवे भुलाकर नए सिरे से रिश्तों की शुरुआत करने का प्रतीक होता है। इस बार अगर आप भी तारीख को लेकर उलझन में थे, तो अब निश्चिंत हो जाइए
3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगों की होली पूरे उत्साह के साथ मनाइए। साथ ही, अगर चंद्र ग्रहण से जुड़ी कोई विशेष मान्यता अपनाते हैं, तो अपने परिवार की परंपरा के अनुसार निर्णय लें। रंगों, मिठाइयों और खुशियों के साथ यह होली आपके जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता लेकर आए
यही शुभकामना है।
Written By Anushri Yadav



