
Business Update: अगर आप नई कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके बजट को सीधे प्रभावित कर सकती है। 1 मार्च से कई गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। वजह है टैक्स और सेस से जुड़े नए बदलाव, जिनका असर खास तौर पर निजी कार खरीदारों पर पड़ सकता है।
हालांकि राहत की बात यह है कि सभी वाहनों पर इसका असर एक जैसा नहीं होगा। यात्री तीन-पहिया वाहन यानी 4 से 7 सीटों वाले ऑटो-रिक्शा को इस सेस से पूरी तरह छूट दी गई है। इसके अलावा खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टरों को भी इस बढ़ोतरी से राहत मिली है।
क्यों बढ़ सकती हैं कीमतें?
सरकार की ओर से लगाए जाने वाले सेस और टैक्स में बदलाव का सीधा असर वाहन निर्माताओं की लागत पर पड़ता है। कंपनियां अक्सर बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डाल देती हैं। ऐसे में कार, एसयूवी और कुछ अन्य निजी वाहनों की एक्स-शोरूम कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है।
ऑटो सेक्टर पहले ही बढ़ती इनपुट कॉस्ट—जैसे स्टील, एल्यूमिनियम और लॉजिस्टिक्स खर्च—से जूझ रहा है। अब अगर सेस में बढ़ोतरी लागू होती है, तो कंपनियां कीमतें बढ़ाने का फैसला ले सकती हैं।
किन्हें मिलेगी राहत?
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4 से 7 सीट वाले यात्री ऑटो-रिक्शा इस सेस से बाहर रखे गए हैं।
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कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टरों को भी छूट दी गई है।
इसका मतलब है कि छोटे व्यवसाय और किसान वर्ग पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
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खरीदार क्या करें?
अगर आप पहले से नई कार खरीदने का मन बना चुके हैं, तो डीलर से तुरंत संपर्क करना समझदारी हो सकती है। कई बार कंपनियां पुराने स्टॉक पर पुरानी कीमतें लागू रखती हैं।
इसके अलावा:
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ऑफर्स और डिस्काउंट की जानकारी लें।
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ऑन-रोड कीमत में टैक्स और इंश्योरेंस का पूरा ब्रेकअप समझें।
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जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अपने बजट और जरूरत को प्राथमिकता दें।
आगे क्या?
ऑटो बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव नया नहीं है। लेकिन टैक्स और सेस में बदलाव हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं, क्योंकि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
अगर आप मार्च में नई गाड़ी लेने की सोच रहे हैं, तो थोड़ा सतर्क रहना बेहतर होगा। सही जानकारी और समय पर फैसला आपको हजारों रुपये बचा सकता है।
Written By: Anushri Yadav



