KGMU में मजारों पर कार्रवाई टली, रमजान-होली के मद्देनज़र 4 अप्रैल तक बढ़ी मोहलत

KGMU : लखनऊ के KGMU परिसर में बनी मजारों पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई फिलहाल टली। रमजान और होली को देखते हुए 4 अप्रैल तक की मोहलत दी गई। प्रशासन ने दोबारा नोटिस जारी कर 28 फरवरी तक जवाब मांगा।

KGMU : लखनऊ स्थित King George’s Medical University (KGMU) परिसर में बनी मजारों को लेकर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई फिलहाल टाल दी गई है। प्रशासन ने रमजान और होली के मद्देनज़र संबंधित कमेटियों को 4 अप्रैल तक की अतिरिक्त मोहलत दी है।

पहले जारी नोटिस के संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने गुरुवार को दोबारा नोटिस जारी करते हुए संबंधित मजार कमेटियों को 28 फरवरी तक कुलसचिव के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।

22 जनवरी को जारी हुआ था पहला नोटिस

KGMU प्रशासन ने 22 जनवरी को परिसर में स्थित मजारों की वैधता, निर्माण की तिथि और संबंधित आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया था। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया था कि सार्वजनिक संस्थान की भूमि पर बने किसी भी ढांचे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होना अनिवार्य है।

पहले नोटिस की अंतिम तिथि 7 फरवरी निर्धारित की गई थी, लेकिन इस अवधि में केवल एक मजार कमेटी ने ही जवाब सौंपा। बाकी पांच कमेटियों की ओर से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

न्यू ऑर्थोपेडिक परिसर की मजार ने किया दावा

न्यू ऑर्थोपेडिक परिसर में स्थित एक मजार कमेटी ने लिखित जवाब में दावा किया है कि संबंधित मजार वर्ष 1947 से पहले की है और उसका ऐतिहासिक महत्व है। कमेटी का कहना है कि मजार का अस्तित्व आजादी से पहले का है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस दावे को गंभीरता से लेते हुए दस्तावेजों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

पांच कमेटियों की चुप्पी पर सख्ती

अन्य पांच मजार कमेटियों की ओर से जवाब न मिलने पर प्रशासन ने इसे गंभीर मामला माना है। दोबारा नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया गया है कि यदि तय समयसीमा तक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो इसे असहयोग माना जाएगा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक भूमि पर स्थित किसी भी धार्मिक या अन्य ढांचे के लिए वैध दस्तावेज आवश्यक हैं।

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