
National News: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में उस समय हड़कंप मच गया जब Pawan Hans का एक हेलीकॉप्टर उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। हालांकि पायलट की सूझबूझ, अनुभव और त्वरित फैसले के चलते संभावित बड़ा हादसा टल गया और हेलीकॉप्टर में सवार सभी सात लोग सुरक्षित बचा लिए गए।
कैसे सामने आई तकनीकी खराबी?
सूत्रों के अनुसार हेलीकॉप्टर ने Port Blair से नियमित उड़ान भरी थी। शुरुआती उड़ान सामान्य थी, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद पायलट को इंजन सिस्टम में असामान्य संकेत मिले। कॉकपिट में चेतावनी अलर्ट दिखाई देने लगे, जिससे साफ हो गया कि तकनीकी समस्या गंभीर हो सकती है।
स्थिति को भांपते हुए पायलट ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क किया और आपात स्थिति की जानकारी दी। चूंकि हेलीकॉप्टर समुद्र के ऊपर उड़ान भर रहा था, इसलिए सुरक्षित विकल्प के तौर पर पानी में नियंत्रित क्रैश लैंडिंग (डिचिंग) का निर्णय लिया गया।
समुद्र में नियंत्रित क्रैश लैंडिंग
पायलट ने हेलीकॉप्टर की गति और ऊंचाई को सावधानीपूर्वक नियंत्रित करते हुए समुद्र की सतह पर संतुलित तरीके से उतारा। यह प्रक्रिया बेहद जोखिमभरी मानी जाती है, क्योंकि जरा सी चूक हेलीकॉप्टर के पलटने या डूबने का कारण बन सकती है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हेलीकॉप्टर पानी की सतह पर उतरते ही कुछ समय तक तैरता रहा, जिससे रेस्क्यू टीमों को यात्रियों तक पहुंचने का समय मिल गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही तटरक्षक बल, स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाएं सक्रिय हो गईं। रेस्क्यू बोट और अन्य सहायता टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया। हेलीकॉप्टर में सवार सभी सात लोगों—जिनमें पायलट और अन्य यात्री शामिल थे—को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
सभी को एहतियातन मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक किसी को गंभीर चोट नहीं आई है, जो इस घटना का सबसे राहत भरा पहलू है।
जांच और सुरक्षा समीक्षा
घटना के बाद संबंधित उड्डयन अधिकारियों ने तकनीकी जांच के आदेश दे दिए हैं। हेलीकॉप्टर के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और तकनीकी सिस्टम की विस्तृत जांच की जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि खराबी अचानक आई या किसी पूर्व संकेत को नजरअंदाज किया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री इलाकों में उड़ान भरने वाले हेलीकॉप्टरों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा मानकों और नियमित मेंटेनेंस की आवश्यकता होती है। इस घटना के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी समीक्षा की जा सकती है।
पायलट की बहादुरी बनी चर्चा का विषय
इस पूरे घटनाक्रम में पायलट की त्वरित प्रतिक्रिया और शांत दिमाग से लिया गया फैसला सराहना का विषय बना हुआ है। यदि समय रहते तकनीकी खराबी को पहचानकर नियंत्रित लैंडिंग का निर्णय न लिया जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
फिलहाल प्रशासन ने राहत की सांस ली है कि सभी सात लोग सुरक्षित हैं। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि आपात स्थिति में प्रशिक्षण, अनुभव और धैर्य कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
Written By: Anushri Yadav



