
Vinay Kwatra Counter Terrorism Meeting: अमेरिका की मेजबानी में आयोजित आतंकवाद-रोधी मंत्री-स्तरीय बैठक में भारत ने एक बार फिर सीमा पार आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ अपना सख्त रुख दुनिया के सामने रखा। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने 67 देशों की मौजूदगी में कहा कि सीमा पार आतंकवाद वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है और इसके दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
बैठक में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की अपील की। साथ ही, उन संगठनों और नेटवर्क पर भी सख्त कार्रवाई की आवश्यकता बताई जो सीमा पार आतंकवाद और अलगाववादी एजेंडे को समर्थन देते हैं।
रुबियो ने अति-वामपंथी आतंकवाद पर जताई चिंता
बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज अति-वामपंथी आतंकवादी नेटवर्क कई देशों में फैले हुए हैं और आधुनिक तकनीक तथा वैश्विक नेटवर्क का इस्तेमाल कर अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।
रुबियो ने कहा कि आतंकवादी एक देश में धन जुटा सकते हैं, दूसरे देश में संचार तंत्र स्थापित कर सकते हैं, तीसरे देश में प्रशिक्षण ले सकते हैं, चौथे देश में भर्ती कर सकते हैं और पांचवें देश में हमला कर सकते हैं। ऐसे में इस चुनौती से निपटने के लिए सभी देशों के बीच प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।
जिहादी आतंकवाद पर भी दिया बड़ा बयान
मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका और यूरोप की आतंकवाद-रोधी रणनीतियों के कारण वहां जिहादी आतंकवाद का खतरा पहले की तुलना में कम हुआ है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि भारत के लिए जिहादी आतंकवाद अब भी गंभीर चुनौती बना हुआ है। उन्होंने 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इस खतरे की गंभीरता को दर्शाता है।
National Awards News-राष्ट्रीय पुरस्कारों में चमकी ‘श्रीकांत’, बनी सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक ऐसे आव्रजन (इमिग्रेशन) तंत्र बने रहेंगे जिनका दुरुपयोग आतंकी नेटवर्क कर सकते हैं, तब तक जिहादी आतंकवाद का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होगा।
भारत ने दोहराया अपना रुख
भारत ने बैठक में स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं हो सकता। भारत ने सभी देशों से आतंकवाद के वित्तपोषण, सीमा पार आतंकी नेटवर्क और चरमपंथी संगठनों के खिलाफ सामूहिक एवं निर्णायक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दुनिया के कई हिस्सों में आतंकवाद और चरमपंथ के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं। भारत ने इस वैश्विक मंच पर एक बार फिर स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग और जवाबदेही ही स्थायी समाधान का आधार है।



