
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों आंतरिक असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों से जूझती नजर आ रही है। लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली पार्टी के भीतर अब नेतृत्व, संगठन और फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हालिया घटनाक्रम ने संकेत दिया है कि चुनावी झटकों के बाद पार्टी के भीतर असहमति की आवाजें पहले से ज्यादा मुखर हो रही हैं।
बैठकों में लगातार घट रही विधायकों की संख्या
TMC की हालिया बैठकों में विधायकों की कम होती उपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।
- 6 मई की बैठक में 80 में से 70 विधायक मौजूद थे।
- 19 मई को यह संख्या घटकर 45 रह गई।
- 31 मई की बैठक में केवल 20 विधायक ही पहुंचे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी का संकेत हो सकती है।
नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर नाराजगी
पार्टी के भीतर असंतोष की एक बड़ी वजह नेता प्रतिपक्ष और अन्य अहम पदों पर नियुक्तियों को माना जा रहा है।
कुछ विधायकों का आरोप है कि महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी राय नहीं ली गई। उनका कहना है कि नेतृत्व से जुड़े पदों पर चुनिंदा नेताओं को प्राथमिकता दी गई, जिससे कई जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ी है।
फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें
मई महीने में पार्टी एक नए विवाद में भी घिर गई। विधानसभा सचिवालय को भेजे गए एक पत्र में कुछ नेताओं की नियुक्ति की जानकारी दी गई थी।
हालांकि बाद में आरोप लगा कि कुछ विधायकों के नाम और हस्ताक्षर बिना अनुमति के इस्तेमाल किए गए। मामले ने तूल पकड़ा और शिकायत दर्ज होने के बाद जांच सीआईडी को सौंप दी गई।
इस विवाद ने पार्टी के भीतर मौजूद मतभेदों को और उजागर कर दिया।
इस्तीफों ने बढ़ाई नेतृत्व की चिंता
पार्टी के भीतर असंतोष केवल विधायकों तक सीमित नहीं रहा।
बारासात जिला इकाई से जुड़े एक वरिष्ठ नेता और सांसद ने संगठनात्मक मुद्दों को लेकर पद छोड़ दिया। इसके बाद एक अन्य वरिष्ठ सांसद ने भी सार्वजनिक रूप से पार्टी के कामकाज पर सवाल उठाए।
इन घटनाओं ने विपक्ष को भी TMC पर निशाना साधने का मौका दिया।
शिकायत करने वाले नेताओं पर कार्रवाई
फर्जी हस्ताक्षर मामले में आपत्ति दर्ज कराने वाले दो विधायकों के खिलाफ पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
नेतृत्व का मानना था कि पार्टी मंच के बजाय सार्वजनिक रूप से शिकायत करने से संगठन की छवि प्रभावित हुई है।
इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर अनुशासन और असहमति को लेकर नई बहस शुरू हो गई।
ममता बनर्जी ने लगाया दबाव का आरोप
मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने दावा किया कि कुछ विधायकों पर बाहरी दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधी दल और अन्य एजेंसियां पार्टी नेताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन के भीतर के मुद्दों को आंतरिक स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए।
आगे क्या?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, TMC के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना है।
चुनावी हार के बाद पार्टी को नए सिरे से कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का भरोसा जीतना होगा। साथ ही नेतृत्व को असंतोष के कारणों पर भी गंभीरता से काम करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
TMC में बढ़ती गुटबाजी, विधायकों की कम होती मौजूदगी और हालिया विवादों ने पार्टी नेतृत्व की चुनौतियों को बढ़ा दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी संगठन को फिर से एकजुट करने में कितने सफल होते हैं।



