
श्री कटरा राम लीला के तत्वाधान मे आयोजित हो रही भव्य एवं अलौकिक राम लीला के पंचम दिवस से पूर्व मुख्य अतिथि गण एवं कमेटी के पदाधिकारी अध्यक्ष सुधीर गुप्ता, महामंत्री उमेश चन्द्र केसरवानी, कोषाध्यक्ष अश्वनी केसरवानी, उपाध्यक्ष विनोद केसरवानी, आनन्द अग्रवाल, मयंक अग्रवाल मंत्री शिव बाबू गुप्ता, महेश चन्द्र गुप्ता, विपुल मित्तल, कार्यकारिणी सदस्य दिलीप चौरसिया, मीडिया प्रभारी डॉ. पवन प्रजापति, रेनू राज सिंह एवं अलोक गुप्ता, ने रामायण जी की आरती की इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य जन एवं दर्शक उपस्थित रहे। कटरा राम लीला प्रांगण मे आयोजित हो रही भव्य एवं आधुनिक रामलीला प्रस्तुति अतुल यदुवंशी के निर्देशन मे ‘गाथा राम की…’ के पाँचवें दिन “पंचवटी का संकट: प्रेम, अपमान और अपहरण” का अत्यंत प्रभावशाली और रोमांचक मंचन किया गया। रंगमंच पर शूर्पणखा प्रसंग से लेकर सीता-हरण तथा जटायु युद्ध तक की घटनाओं का ऐसा सजीव प्रदर्शन हुआ कि पूरा प्रांगण जय श्री राम के जयकारों से गूँज उठा और दर्शक रोमांच, वीरता एवं करुणा के भावों में डूब गए।
मंचन की शुरुआत पंचवटी के शांत और प्राकृतिक वातावरण के दृश्य से हुई। लंकापति रावण की बहन सूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए रावण द्वारा रची गई कपट-नीति के तहत मारीच सुवर्ण मृग (सोने का हिरण) बनकर आया। माता सीता के आग्रह पर भगवान श्री राम उस अद्भुत मृग का पीछा करने वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
मंचन के अगले चरण में मारीच की कपटपूर्ण चीत्कार सुनकर व्याकुल हुई माता सीता के कहने पर लक्ष्मण जी सुरक्षा के लिए लक्ष्मण रेखा खींचकर राम की खोज में निकलते हैं। इसके पश्चात रावण साधु का वेश धरकर छल-पूर्वक माता सीता का हरण कर लेता है।
मंचन का सबसे रोमांचक क्षण
“जटायु-रावण युद्ध” का दृश्य रहा। जब लंकापति रावण माता सीता को आकाश मार्ग से ले जा रहा था, तब वृद्ध पक्षीराज जटायु ने अधर्म का विरोध करते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया। जटायु और रावण के बीच हुए भीषण युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में रावण द्वारा जटायु के पंख काट देने और जटायु के भूमि पर गिरकर श्री राम के चरणों में प्राण त्यागने का दृश्य देखकर पूरा पंडाल अश्रुपूरित हो उठा।



