CJP protest : छात्रों पर FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम

CJP protest : छात्रों पर दर्ज FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जानकारी मांगी है। CJP ने सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए देशव्यापी कार्रवाई की चेतावनी दी।

CJP protest : छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के बाद मामला गरमा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, CJP प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्र सरकार पर जुलाई में किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सरकार ने तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए तो संगठन अगले दो दिनों में अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाकर देशव्यापी कार्रवाई पर फैसला करेगा।

दास ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की समेकित सूची मांगी है, ताकि जरूरत पड़ने पर संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मामलों को एक साथ रद्द करने पर विचार किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र के वकील ने सूची उपलब्ध कराने पर सहमति नहीं दी।

सुप्रीम कोर्ट ने FIR की जानकारी मांगी

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से उन FIR का विवरण उपलब्ध कराने को कहा, जिनमें छात्र प्रदर्शनकारी आरोपी बनाए गए हैं।

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि छात्रों का भविष्य दांव पर है और उन्हें संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत विरोध प्रदर्शन का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह अपने व्यापक संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करने पर विचार कर सकती है।

CJP ने जुलाई के समझौते का दिया हवाला

सौरव दास के मुताबिक, CJP ने 25 जुलाई को सरकार की ओर से FIR वापस लेने, प्रदर्शनकारियों को दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा देने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की प्रतिबद्धता के बाद अपना आंदोलन समाप्त किया था।

दास ने आरोप लगाया कि अब सरकार इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने से पीछे हट रही है। उन्होंने कहा कि संगठन ने बातचीत और सरकार को पर्याप्त समय देने का रास्ता अपनाया, लेकिन अब उसका धैर्य जवाब दे रहा है।

दो दिन में देशव्यापी आंदोलन पर फैसला

CJP प्रवक्ता ने कहा कि यदि सरकार ने जुलाई की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए तो संगठन की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक अगले दो दिनों में होगी। इसमें आगे की देशव्यापी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

प्रदर्शन में हिंसा को लेकर सरकार का पक्ष

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पुलिस ने 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान हिंसा के लिए 2,800 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की है, जिन्हें पुलिस ने पहले गंभीर अपराधों में शामिल बताया है।

वहीं, कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पुलिस द्वारा कथित तौर पर चेहरे की पहचान तकनीक, निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि इस तरह की तकनीक के जरिए प्रदर्शनकारियों की पहचान और डेटा संग्रह निजता के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

Facial Recognition पर भी सुप्रीम कोर्ट की नजर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चेहरे की पहचान तकनीक, निगरानी, निजता और अनुच्छेद 21 से जुड़े संवैधानिक सवालों पर अंतिम निर्णय अदालत स्वयं करेगी। पीठ के अनुसार, समिति मुख्य रूप से तथ्यों की जांच करेगी, जिसमें पुलिस बल के इस्तेमाल की आवश्यकता और उसकी अधिकता जैसे पहलू शामिल होंगे।

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि इस्तेमाल की गई facial recognition तकनीक सभी लोगों के चेहरे स्कैन नहीं करती, बल्कि उन लोगों को चिन्हित करती है जिनका डेटा पहले गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में उपलब्ध है।

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