Mass Protest India: आजादी के बाद सबसे बड़ा जनसैलाब कब उमड़ा? जानिए किसान आंदोलन का इतिहास

Mass Protest India: किसान आंदोलन को स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े जन आंदोलनों में गिना जाता है, लेकिन इससे पहले जेपी आंदोलन और बाद में अन्ना आंदोलन ने भी देश की राजनीति पर गहरा असर डाला था।

Mass Protest India: देश में जब भी बड़े विरोध प्रदर्शनों या जन आंदोलनों की चर्चा होती है, तो कई ऐतिहासिक घटनाएं याद की जाती हैं। हाल के दिनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर हुए प्रदर्शनों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा जन आंदोलन कौन सा था और उसमें कितने लोग शामिल हुए थे।

विशेषज्ञों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2020-21 का किसान आंदोलन स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े जन आंदोलनों में शामिल माना जाता है। तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन कई महीनों तक दिल्ली की सीमाओं पर जारी रहा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से बड़ी संख्या में किसान आंदोलन का हिस्सा बने।

करोड़ों लोगों की भागीदारी का दावा

किसान संगठनों द्वारा आयोजित देशव्यापी बंद और हड़ताल के दौरान करोड़ों लोगों की भागीदारी का दावा किया गया था। कई रिपोर्टों में यह संख्या 25 करोड़ तक बताई गई, जिसके कारण इसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक आंदोलनों में भी गिना गया। आंदोलन के दौरान दिल्ली की सीमाओं पर लंबे समय तक हजारों ट्रैक्टर, टेंट और अस्थायी शिविर दिखाई दिए।

एक साल से ज्यादा समय तक चला आंदोलन

यह आंदोलन केवल कुछ दिनों या हफ्तों तक सीमित नहीं रहा। किसानों ने लगातार धरना जारी रखा और सरकार के साथ कई दौर की बातचीत भी हुई। आखिरकार केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का फैसला किया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ। इसी वजह से यह आंदोलन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।

जेपी आंदोलन ने भी बदली थी राजनीति

किसान आंदोलन से पहले 1974 का जयप्रकाश नारायण (जेपी) आंदोलन भी देश के सबसे प्रभावशाली जन आंदोलनों में गिना जाता है। भ्रष्टाचार और शासन व्यवस्था के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन ने तत्कालीन राजनीतिक माहौल को पूरी तरह बदल दिया था। बड़ी संख्या में छात्र, युवा और आम नागरिक इससे जुड़े थे।

अन्ना आंदोलन की भी रही बड़ी भूमिका

साल 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में शुरू हुआ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन भी देशव्यापी जन समर्थन जुटाने में सफल रहा था। दिल्ली के रामलीला मैदान से शुरू हुए इस आंदोलन ने लाखों लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया और भारतीय राजनीति में नए बदलावों की जमीन तैयार की।

लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक

भारत में हुए ये बड़े जन आंदोलन इस बात का उदाहरण हैं कि लोकतंत्र में जनता की आवाज कितनी प्रभावशाली हो सकती है। चाहे किसान आंदोलन हो, जेपी आंदोलन हो या अन्ना आंदोलन, इन सभी ने अलग-अलग समय पर सरकारों और नीतियों को प्रभावित किया तथा देश की राजनीति की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

written by Siddhi Srivastava

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