
Sonipat News: सोशल मीडिया पर एक भावुक कहानी तेजी से वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि महाराष्ट्र के 74 वर्षीय शिवचरण रामरत्न गुप्ता, जिन्होंने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर शिक्षक बनाया और जीवन में आगे बढ़ाया, बुढ़ापे में हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हो गए। उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार में बेटियों के शामिल न होने की बात भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
क्या है वायरल दावा?
सोशल मीडिया पोस्टों में दावा किया जा रहा है कि शिवचरण रामरत्न गुप्ता अपनी पत्नी के निधन के बाद वृद्धाश्रम में रह रहे थे। हाल ही में उनके निधन के बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने उनकी बेटियों को सूचना दी और अंतिम संस्कार में शामिल होने का आग्रह किया।
वायरल दावे के अनुसार, बेटियों ने दूरी और व्यस्तता का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार में आने में असमर्थता जताई। पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि उन्होंने अंतिम संस्कार का खर्च ऑनलाइन भेजने और वीडियो कॉल के माध्यम से अंतिम दर्शन करने की बात कही।
सोशल मीडिया पर भावुक प्रतिक्रियाएं
यह कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की भावुक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स इसे बदलते पारिवारिक संबंधों और बुजुर्गों की उपेक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, कई लोगों ने माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियों और सम्मान को लेकर चिंता जताई है।
बुजुर्गों की देखभाल पर फिर छिड़ी चर्चा
इस घटना के वायरल होने के बाद एक बार फिर बुजुर्गों की देखभाल, वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या और परिवारों में बदलते सामाजिक रिश्तों पर बहस शुरू हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बुजुर्गों को केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि भावनात्मक सहयोग और परिवार का साथ भी चाहिए होता है।
दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
फिलहाल, सोशल मीडिया पर वायरल इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल पोस्ट में किए गए सभी दावे पूरी तरह सही हैं या नहीं। ऐसे मामलों में आधिकारिक जानकारी और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।



