
Delhi SIR Notice 2026: दिल्ली में मतदाता सूची के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता को नोटिस जारी किए जाने का मतलब यह नहीं है कि उसका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा। चुनाव आयोग की यह सफाई उस समय आई है, जब पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बीजेपी के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत कई प्रमुख लोगों को SIR के दौरान नोटिस जारी किए गए हैं।
नोटिस मिलने का क्या मतलब है?
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के अनुसार, SIR के दौरान मतदाता सूची में दर्ज कुछ जानकारियों में विसंगतियां मिलने पर सिस्टम-जेनरेटेड नोटिस भेजे जा रहे हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि नोटिस जारी होना अपने आप में नाम हटाने की प्रक्रिया नहीं है।
CEO कार्यालय ने कहा कि किसी भी मतदाता का नाम उसकी बात सुने बिना वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देना और उचित, तर्कपूर्ण तथा अपील योग्य आदेश जारी करना जरूरी है।
केजरीवाल, आडवाणी और जयशंकर समेत कई नाम
SIR के दौरान जिन प्रमुख लोगों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है, उनमें अरविंद केजरीवाल, एलके आडवाणी, मनीष सिसोदिया, कैलाश गहलोत और एस जयशंकर के नाम शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, नोटिस अलग-अलग तरह की विसंगतियों और पिछली मतदाता सूची से रिकॉर्ड का मिलान नहीं होने जैसी वजहों से जारी किए गए हैं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी उन मतदाताओं में शामिल बताए गए जिन्हें SIR के दौरान नोटिस जारी हुए। CEO कार्यालय ने बाद में बताया कि सत्यापन के बाद रेखा गुप्ता का नाम वैरिफाई कर दिया गया।
SIR में क्यों भेजे जा रहे हैं नोटिस?
चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं की जानकारी को पिछली गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची से जोड़कर देखा जा रहा है।
जिन मतदाताओं की एंट्री पिछली सूची से मैप नहीं हो पा रही है या जिनके रिकॉर्ड में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ पाई गई है, उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। दिल्ली में ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त को प्रकाशित की गई थी।
नोटिस मिलने पर मतदाता क्या करें?
नोटिस पाने वाले मतदाता संबंधित Electoral Registration Officer (ERO) या Booth Level Officer (BLO) के समक्ष अपना जवाब और आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकते हैं।
भारत निर्वाचन आयोग के वोटर सर्विस पोर्टल पर SIR-2026 के तहत नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
EC ने क्या कहा?
CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस को वोटर लिस्ट से नाम हटाने का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना जरूरी है और उसके बाद ही उचित आदेश की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
इसलिए SIR नोटिस मिलने वाले मतदाताओं को घबराने के बजाय नोटिस में दिए गए निर्देशों के अनुसार संबंधित निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना जवाब और दस्तावेज प्रस्तुत करने चाहिए।



