
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने 26 दिनों के अनशन को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा थी कि कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उनके हाथों अनशन तुड़वाएं। इसके लिए उनकी पत्नी गीतांजलि ने राहुल गांधी से संपर्क करने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
पत्नी ने की थी संपर्क की कोशिश
एक इंटरव्यू में सोनम वांगचुक ने बताया कि उनकी पत्नी गीतांजलि इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय थीं और उन्होंने राहुल गांधी तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। वांगचुक के मुताबिक, इसका किसी राजनीतिक समर्थन या विरोध से कोई संबंध नहीं था, बल्कि वे चाहते थे कि अनशन समाप्त करने का संदेश सर्वदलीय एकजुटता का प्रतीक बने।
फिर कैसे टूटा अनशन?
सोनम वांगचुक ने बताया कि 23 और 24 जुलाई की रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह अस्पताल पहुंचे। सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने दोनों मंत्रियों के हाथों सूप पीकर अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त किया।
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‘तस्वीरें साझा न करने की बात हुई थी’
वांगचुक का दावा है कि उन्होंने अनशन तोड़ने से पहले एक शर्त रखी थी कि इस घटना को किसी एक राजनीतिक दल के कार्यक्रम की तरह पेश नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने विपक्षी नेताओं और छात्र प्रतिनिधियों की मौजूदगी या तस्वीरों की भी बात रखी थी ताकि यह संदेश जाए कि यह सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
हालांकि, उनके अनुसार कुछ ही मिनटों बाद उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर दी गईं, जिसे उन्होंने आपसी सहमति का उल्लंघन बताया। वांगचुक ने कहा कि इस घटना के बाद उनका राजनीतिक नेताओं पर भरोसा कमजोर हुआ है।
26 दिन तक चला था अनशन
सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को छात्रों के आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की थी। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद 24 जुलाई को उन्होंने अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया।



