
Devendra Fadnavis: राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान हुए एक कॉमेडी एक्ट ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कार्यक्रम में कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंदाज की मिमिक्री की। वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। इसी मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधा।
फडणवीस बोले- राजनीति छोड़ कॉमेडी करें राहुल
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विवाद पर राहुल गांधी पर व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी इसी तरह मिमिक्री करते हैं तो उन्हें कांग्रेस छोड़कर स्टैंड-अप कॉमेडियन बन जाना चाहिए।
फडणवीस ने यह टिप्पणी राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका पर तंज के तौर पर की। उनके बयान को बीजेपी की ओर से चल रहे उस व्यापक हमले के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें पार्टी नेता कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की मिमिक्री को लेकर कांग्रेस को घेर रहे हैं।
क्या हुआ था ‘छात्रों की गूंज’ में?
19 सितंबर को इंदौर में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों से संवाद और उनके मुद्दों को सामने रखना था। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी मंच पर कॉमेडियन पुलकित मणि के साथ नजर आए। मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बोलने और बातचीत करने के अंदाज की नकल की।
वीडियो में राहुल गांधी को कॉमेडियन के साथ बातचीत और हंसते हुए देखा गया। इसी हिस्से को लेकर बीजेपी ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि मंच से प्रधानमंत्री का मजाक बनाया गया।
बीजेपी ने बुजुर्ग महिला से जुड़े प्रसंग पर भी उठाया सवाल
विवाद सिर्फ प्रधानमंत्री की मिमिक्री तक सीमित नहीं रहा। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि एक्ट में प्रधानमंत्री और एक बुजुर्ग महिला से जुड़े पुराने प्रसंग का भी मजाक बनाया गया।
बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवन ने राहुल गांधी पर महिलाओं और बुजुर्गों के सम्मान को लेकर सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी इस घटना की आलोचना करते हुए कहा कि छात्र संवाद जैसे मंच पर इस तरह का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए था। ये बीजेपी नेताओं के आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं।
विपक्ष ने क्या कहा?
विवाद के बाद विपक्षी नेताओं ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के नेताओं ने कहा कि कार्यक्रम में राजनीतिक व्यंग्य और हास्य का इस्तेमाल किया गया था और इसे प्रधानमंत्री या उनकी मां के अपमान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भी कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले जो बातें कही थीं, उन्हीं को दोहराते हुए हास्य किया गया। उन्होंने राजनीतिक संवाद में हास्य और व्यंग्य के लिए जगह होने की बात कही। विपक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि बीजेपी पहले विपक्षी नेताओं को लेकर किए गए राजनीतिक व्यंग्य और टिप्पणियों पर समान मानक नहीं अपनाती रही है।
छात्रों के मुद्दों पर भी हुई थी चर्चा
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का मूल फोकस छात्रों से जुड़े सवाल और शिक्षा-रोजगार के मुद्दे थे। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के सवालों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
कार्यक्रम के बाद हालांकि राजनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा कॉमेडी एक्ट और प्रधानमंत्री की मिमिक्री पर केंद्रित हो गया। अब बीजेपी और विपक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी जारी है।



