SGPGI दीक्षांत समारोह पर फैकल्टी फोरम ने उठाए सवाल, निदेशक को लिखे 5 सुझावों वाला पत्र

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के 30वें दीक्षांत समारोह के आयोजन को लेकर संस्थान के फैकल्टी फोरम ने कुछ व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल पर सवाल उठाए हैं। फोरम ने संस्थान के निदेशक डॉ. आर.के. धीमन को पत्र लिखकर भविष्य के दीक्षांत समारोहों की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखने के लिए पांच महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष डॉ. मोहन गुर्जर और सचिव डॉ. विवेक सिंह समेत अन्य पदाधिकारियों द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों, अभिभावकों और संस्थान के लिए गर्व का अवसर होता है। हालांकि, इस बार कुछ व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता महसूस की गई।

फोरम ने दिए ये प्रमुख सुझाव

फोरम ने अपने पत्र में निम्नलिखित सुझाव रखे हैं:

  • विद्यार्थियों को डिग्रियां मुख्य अतिथि के हाथों प्रदान की जाएं।
  • दीक्षांत समारोह छुट्टियों के बजाय शैक्षणिक सत्र के दौरान आयोजित किया जाए।
  • लंबे कार्यक्रम में संस्थान के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाए।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन डिग्री वितरण के बाद रखा जाए।
  • पहले की परंपरा के अनुसार शोभायात्रा में शामिल फैकल्टी का परिचय आगंतुक (Visitor) से कराया जाए तथा मुख्य अतिथि ऐसे शिक्षाविद हों जिनके विचार विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक हों।

मुख्य अतिथि का दौरा अंतिम समय में हुआ था रद्द

फोरम ने पत्र में उल्लेख किया कि इस बार समारोह में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाले थे, लेकिन उनका कार्यक्रम अंतिम समय में रद्द हो गया। इसके बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की उपस्थिति में समारोह संपन्न हुआ।

‘आलोचना नहीं, सुधार हमारा उद्देश्य’

फैकल्टी फोरम ने स्पष्ट किया है कि पत्र का उद्देश्य आयोजन समिति की आलोचना करना नहीं है। उनका कहना है कि इन सुझावों का मकसद भविष्य के दीक्षांत समारोहों की गरिमा, अनुशासन और संस्थान की प्रतिष्ठा को और मजबूत करना है।

फिलहाल SGPGI प्रशासन की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि भविष्य के आयोजनों में फोरम के सुझावों पर विचार किया जा सकता है।

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