
Bollywood News: ‘मिर्जापुर’ वेब सीरीज के किरदारों की अपनी अलग पहचान है। अब इसी लोकप्रिय फ्रेंचाइजी पर बनी फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ भी दर्शकों के बीच चर्चा में है। पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु जैसे कलाकारों वाली इस फिल्म में रवि किशन ने बब्बन बबुआ यादव का किरदार निभाया है।
फिल्म 4 सितंबर को रिलीज हुई और इसे दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली। खास तौर पर रवि किशन के किरदार बब्बन बबुआ को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा देखने को मिली। अब फिल्म के निर्देशक गुरमीत सिंह और लेखक पुनीत कृष्णा ने खुलासा किया है कि रवि किशन की वजह से कहानी के कुछ हिस्सों में बदलाव करना पड़ा।
बब्बन बबुआ को क्यों बनाया गया अलग किरदार
निर्देशक गुरमीत सिंह और लेखक पुनीत कृष्णा के मुताबिक, बब्बन बबुआ को जानबूझकर एक सामान्य गैंगस्टर से अलग रखा गया। वह अपराध की दुनिया से जुड़ा है, लेकिन अपनी प्रेमिका मुमताज के लिए उसका व्यवहार काफी अलग नजर आता है।
मुमताज का किरदार सोनल चौहान ने निभाया है। बब्बन अपनी प्रेमिका से बेहद प्यार करता है। वह उसके लिए कपड़े तक सिलता है। इसी वजह से निर्माताओं ने उसके किरदार को मजाकिया अंदाज में ‘ग्रीन फ्लैग गैंगस्टर’ जैसा रूप दिया।
क्लाइमेक्स को लेकर निर्माताओं को थी चिंता
फिल्म के क्लाइमेक्स को लेकर मेकर्स के सामने एक बड़ी चुनौती थी। उन्हें डर था कि अगर बब्बन की मौत को बहुत भावुक तरीके से दिखाया गया तो दर्शक उसके साथ जरूरत से ज्यादा जुड़ सकते हैं।
लेखक पुनीत कृष्णा के मुताबिक, उन्हें चिंता थी कि बब्बन की मौत के बाद दर्शकों की सहानुभूति इतनी ज्यादा हो सकती है कि वे कहानी के दूसरे मुख्य किरदारों को नजरअंदाज करने लगें।
यही वजह थी कि क्लाइमेक्स के भावनात्मक संतुलन पर काफी काम किया गया।
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चंदू पंचर के सीन को किया गया ज्यादा प्रभावी
निर्देशक गुरमीत सिंह ने बताया कि क्लाइमेक्स को संतुलित रखने के लिए चंदू पंचर के किरदार को लेकर एक अहम फैसला लिया गया। चंदू पंचर का किरदार सतेंद्र सोनी ने निभाया है।
बब्बन की मौत के सीन को जरूरत से ज्यादा भावुक बनाने के बजाय चंदू पंचर की मौत को ज्यादा प्रभावशाली और क्रूर रखा गया। मेकर्स का मानना था कि इससे कहानी का भावनात्मक संतुलन बना रहेगा और दर्शकों का ध्यान सिर्फ एक किरदार पर नहीं टिकेगा।
मुख्य किरदारों को मारना नहीं था विकल्प
फिल्म की कहानी पर काम करते समय एक और चुनौती सामने थी। ‘मिर्जापुर’ के पुराने दर्शक पहले से जानते हैं कि इस फ्रेंचाइजी की कहानी किस तरह आगे बढ़ती है।
ऐसे में मेकर्स के लिए कहानी में रोमांच बनाए रखना आसान नहीं था। निर्देशक ने बताया कि मुख्य किरदारों को खत्म करने का विकल्प उनके पास नहीं था। इसलिए नए किरदारों और घटनाओं के जरिए कहानी में दिलचस्पी बनाए रखने की कोशिश की गई।
रवि किशन ने कई सीन में किया इम्प्रोवाइजेशन
बब्बन बबुआ के किरदार को खास बनाने में रवि किशन का भी बड़ा योगदान रहा। उन्होंने फिल्म के कई दृश्यों में अपने स्तर पर इम्प्रोवाइजेशन किया।
ऐसा ही एक सीन उस समय देखने को मिलता है, जब बब्बन एक व्यक्ति को चाकू मारने के बाद ‘लव यू मुमताज’ चिल्लाता है। यह डायलॉग मूल स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था।
लेखक पुनीत कृष्णा के मुताबिक, यह पूरी तरह रवि किशन का आइडिया था। इस सीन ने बब्बन के किरदार के खतरनाक और रोमांटिक दोनों पहलुओं को एक साथ सामने रखा।
कान दबाने वाला सीन भी रवि किशन का आइडिया
फिल्म के एक दूसरे सीन में बब्बन, जेपी यादव के कान दबाता नजर आता है। निर्देशक के मुताबिक, इस सीन में मसाज करने का विचार उनका था, लेकिन कान दबाने का आइडिया रवि किशन ने दिया था।
ऐसे छोटे छोटे इम्प्रोवाइजेशन ने बब्बन के किरदार को और अलग बनाने में मदद की। यही वजह है कि फिल्म में यह किरदार दर्शकों के बीच अपनी अलग जगह बनाता दिखाई देता है।
रवि किशन ने बब्बन को दिया अलग अंदाज
‘मिर्जापुर: द मूवी’ में रवि किशन का बब्बन बबुआ यादव वाला अंदाज फिल्म की चर्चा की बड़ी वजह बना है। एक तरफ उसका किरदार हिंसक और खतरनाक है। दूसरी तरफ प्रेमिका मुमताज के लिए उसका व्यवहार उसे बाकी गैंगस्टर किरदारों से अलग बनाता है।
निर्देशक और लेखक के खुलासे से यह भी पता चलता है कि रवि किशन ने सिर्फ स्क्रिप्ट के मुताबिक अभिनय नहीं किया। उनके कई सुझावों और इम्प्रोवाइजेशन को फिल्म में शामिल किया गया।
यही बदलाव बब्बन के किरदार को ज्यादा यादगार बनाने में मदद करते हैं।


