Ram Mandir: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस का सवाल- ‘बड़ी मछलियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?’ जयराम रमेश ने मांगी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच

105 सीसीटीवी घटनाओं और 79.85 लाख रुपये की बरामदगी पर उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग

Ram Mandir: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जांच पूरी होने और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी के बाद कांग्रेस ने कार्रवाई के दायरे पर सवाल उठाए हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने पूछा है कि अगर चोरी की घटनाएं सीसीटीवी कैमरों में दर्ज हुईं और लाखों रुपये की बरामदगी हुई, तो मंदिर के चढ़ावे की सुरक्षा और निगरानी के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ लोगों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई?

कांग्रेस नेता ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार की एसआईटी ने जांच को सीमित दायरे में पूरा मान लिया, जबकि कई अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

105 घटनाएं सीसीटीवी में दर्ज, 79.85 लाख रुपये की बरामदगी

जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट में जांच के दौरान सामने आए आंकड़ों का हवाला देते हुए पूछा कि 45 दिनों के भीतर चढ़ावे की नकदी निकालने या छिपाने की 105 घटनाएं कैमरों में रिकॉर्ड हुईं, तो इस दौरान कुल कितनी रकम गायब हुई? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब तक कितनी राशि बरामद की गई है और कितनी की वसूली बाकी है।

दरअसल, एसआईटी की जांच में मंदिर परिसर के नकदी गिनने वाले स्थान पर कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से रुपये निकालने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आई थीं। इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सात आरोपियों से कुल 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए। जांच में बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की गई।

कांग्रेस नेता ने इसी आंकड़े को आधार बनाकर सरकार से पूछा कि जब श्रद्धालुओं ने बड़ी मात्रा में चढ़ावा दिया, तो कथित चोरी के मामले में बरामद रकम इतनी ही क्यों है? उन्होंने सरकार से पूरे मामले का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही यह भी पूछा कि क्या सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई और चोरी की घटनाओं से जुड़े सभी रिकॉर्ड सामने रखे गए हैं?

ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल

जयराम रमेश का मुख्य सवाल मंदिर के चढ़ावे की सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था को लेकर है। उन्होंने पूछा कि जब चढ़ावे की गिनती, उसका हिसाब रखने और सुरक्षा की जिम्मेदारी तय लोगों के पास थी, तो इन व्यवस्थाओं में कथित गड़बड़ियों के लिए वरिष्ठ पदाधिकारियों की जवाबदेही क्यों नहीं तय की गई?

उन्होंने आरोप लगाया कि आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर देना पूरे मामले की जांच का अंतिम पड़ाव नहीं हो सकता। कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं; जांच में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष तय करने का अधिकार अदालत के पास है।

एसआईटी की जांच पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जांच पूरी घोषित किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि एसआईटी ने जिन आठ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है, उसके अलावा ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था और वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच भी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े सभी स्तरों की जवाबदेही तय करने के लिए अलग से निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई गई। जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए उसके पुनर्गठन की मांग भी उठाई।

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सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर को क्या फैसला दिया था?

इस विवाद में 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का एक अहम आदेश भी आया था। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि एसआईटी जांच पूरी कर चुकी है और आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की निगरानी से जुड़ी याचिकाओं का निपटारा कर दिया।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अयोध्या की संबंधित निचली अदालत में चलने वाली सुनवाई में सहायता करने की अनुमति दी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। यानी सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को किसी भी पक्ष के लिए क्लीन चिट नहीं माना जा सकता। अब मामले की सुनवाई संबंधित अदालत में कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी।

ऐसे में जयराम रमेश की ताजा मांग ने मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को फिर राजनीतिक चर्चा में ला दिया है। कांग्रेस जहां जांच के दायरे और वरिष्ठ पदाधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है, वहीं एसआईटी की चार्जशीट के आधार पर अब आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़नी है। इस मामले में अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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