
Pratapgarh News: प्रतापगढ़ जिले के कटरा मेदिनी स्थित पराग सहकारी दुग्ध उत्पादन केंद्र को दोबारा शुरू कराने की मांग अब संसद तक पहुंच गई है। बेल्हा प्रतापगढ़ के राज्यसभा सांसद अमर पाल मौर्य ने सदन में इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाते हुए सरकार से केंद्र को पुनः संचालित किए जाने की मांग की है। सांसद की इस पहल के सामने आने के बाद प्रतापगढ़ में उनके समर्थकों, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। लोगों ने इसे जिले के किसानों और दुग्ध उत्पादकों के हित से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है।
कटरा मेदिनी स्थित पराग सहकारी दुग्ध उत्पादन केंद्र कभी स्थानीय दुग्ध उत्पादकों और किसानों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था। इसके दोबारा संचालन की मांग लंबे समय से उठती रही है। अब राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाए जाने से जिले के किसानों को उम्मीद जगी है कि बंद पड़े केंद्र को फिर से शुरू करने की दिशा में सरकार जल्द कोई सकारात्मक निर्णय ले सकती है।
सांसद अमर पाल मौर्य ने सदन में इस मांग को रखते हुए बताया कि कटरा मेदिनी स्थित पराग सहकारी दुग्ध उत्पादन केंद्र के पुनः संचालन से प्रतापगढ़ जिले के करीब 20 हजार किसानों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है। केंद्र के शुरू होने से किसानों को अपने दुग्ध उत्पादन के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके साथ ही दुग्ध व्यवसाय से जुड़े अन्य लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
दूध उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रतापगढ़ जैसे जिले में बड़ी संख्या में किसान खेती के साथ पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय पर भी निर्भर हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर दुग्ध संग्रहण और प्रसंस्करण की व्यवस्था मजबूत होने से किसानों को अपने उत्पाद की बिक्री के लिए बेहतर अवसर मिल सकते हैं। पराग सहकारी दुग्ध उत्पादन केंद्र के पुनः संचालन से इसी व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सांसद की ओर से रखी गई मांग में केवल केंद्र को दोबारा चालू करने की बात नहीं है, बल्कि इससे जुड़े व्यापक आर्थिक प्रभावों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया है। केंद्र के संचालन से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ इससे जुड़े कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। दूध संग्रहण, परिवहन, पशुपालन, चारा, डेयरी से जुड़े कार्यों और अन्य सहायक गतिविधियों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
प्रतापगढ़ में सांसद की इस पहल की जानकारी सामने आने के बाद उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया। स्थानीय लोगों ने कहा कि जिले के किसी महत्वपूर्ण आर्थिक और किसान हित के मुद्दे को राज्यसभा में उठाना क्षेत्र के लिए सकारात्मक संदेश है। समर्थकों का कहना है कि यदि पराग सहकारी दुग्ध उत्पादन केंद्र दोबारा शुरू होता है तो इसका फायदा केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जिले की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय को मजबूत करना जरूरी माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों के लिए दूध उत्पादन नियमित आय का जरिया होता है। यदि उन्हें स्थानीय स्तर पर दूध की खरीद और विपणन की बेहतर व्यवस्था मिलती है तो उन्हें अपने उत्पाद को दूर के बाजारों तक ले जाने की परेशानी कम हो सकती है। इससे परिवहन लागत और समय की बचत भी संभव है।
पराग सहकारी दुग्ध उत्पादन केंद्र के पुनः संचालन से जिले में दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। यदि केंद्र पूरी क्षमता के साथ काम करता है तो स्थानीय दुग्ध उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़ने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा पशुपालकों को भी अधिक संख्या में पशुपालन की ओर आकर्षित करने का अवसर मिल सकता है।
इस मांग को लेकर प्रतापगढ़ के लोगों में इसलिए भी उत्सुकता है क्योंकि इसका सीधा संबंध ग्रामीण परिवारों की आमदनी से जुड़ा हुआ है। करीब 20 हजार किसानों को संभावित प्रत्यक्ष लाभ मिलने की बात सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोगों को उम्मीद है कि सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी और केंद्र को फिर से शुरू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगी।
सांसद अमर पाल मौर्य की इस पहल को उनके समर्थक क्षेत्र के विकास से जोड़कर देख रहे हैं। कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों का कहना है कि राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण सदन में प्रतापगढ़ के स्थानीय मुद्दे को उठाए जाने से जिले की समस्याओं और संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का अवसर मिला है।
अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं। यदि कटरा मेदिनी स्थित पराग सहकारी दुग्ध उत्पादन केंद्र को दोबारा शुरू करने की मंजूरी मिलती है तो इससे प्रतापगढ़ के हजारों किसानों और पशुपालकों को लाभ मिलने की संभावना है। इससे दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। फिलहाल सांसद की इस मांग के बाद बेल्हा में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है और सभी को उम्मीद है कि सरकार इस जनहितकारी मांग पर जल्द सकारात्मक फैसला करेगी।
रिपोर्ट: उमेश पाण्डेय



