Pratapgarh News: 17 सूत्रीय मांगों को लेकर ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों का प्रदर्शन, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

Pratapgarh News: Trade unions and farmers' organizations protest over 17-point demands; memorandum submitted to the Governor.

Pratapgarh News:केंद्रीय श्रम संगठनों, कर्मचारी संगठनों और किसान संगठनों के संयुक्त आह्वान पर सोमवार को प्रतापगढ़ में जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। कर्मचारी, मजदूर और किसानों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शनकारी जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचे। करीब 11 बजे हुए प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को राज्यपाल के नाम संबोधित 17 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया।

प्रदर्शन में जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल, किसान सभा और उनसे जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल रहे। कार्यक्रम में मजदूर नेता हेमन्त नन्दन ओझा, राम बरन सिंह, राजमणि पाण्डेय, निर्भय प्रताप सिंह, वीपी त्रिपाठी, रोशन अली, विवेक श्रीवास्तव, कृष्ण लाल शर्मा, सुनील पटेल, धर्मेंद्र यादव, संतोष प्रजापति, मोहम्मद आमिर, आशुतोष शुक्ला, राम आधार यादव, राजेंद्र सिंह, राधेश्याम पटेल, प्रवीण विश्वकर्मा, कमलेश मिश्रा और सुरेश शर्मा समेत कई लोग मौजूद रहे।

इन मांगों को लेकर उठाई आवाज

प्रदर्शनकारियों ने ट्रेड यूनियन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार की गारंटी, महंगाई को ध्यान में रखते हुए 42 हजार रुपये प्रतिमाह की वैधानिक न्यूनतम मजदूरी लागू करने और श्रमिकों के हितों की सुरक्षा की मांग की।

इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों, बीमा कंपनियों तथा अन्य सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण और राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन पर रोक लगाने की मांग उठाई गई। संगठित क्षेत्र के साथ गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा देने की भी मांग की गई।

प्रदर्शनकारियों ने बेरोजगार युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने और केंद्र व राज्य सरकार के रिक्त पदों पर भर्ती किए जाने की मांग रखी। सार्वजनिक शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने तथा श्रम संहिताओं और उनके नियमों को वापस लेने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

किसानों से संबंधित मांगों में सभी फसलों की C2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद की गारंटी, किसानों और गरीबों के लिए व्यापक ऋण माफी, कृषि आधारित उद्योगों और सहकारी क्षेत्र को आधुनिक बनाने की मांग प्रमुख रही।

इसके अलावा श्रम कानूनों का प्रभावी पालन कराने, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा पर रोक लगाने, असुरक्षित रोजगार की प्रवृत्ति को खत्म करने, विद्युत संशोधन विधेयक 2025 को वापस लेने और बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग भी उठाई।

नारेबाजी कर जताया विरोध

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों, मजदूरों और किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘किसान मजदूर कर्मचारी एकता जिंदाबाद’, ‘महंगाई पर रोक लगाओ’, ‘श्रम संहिता वापस लो’, ‘न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दो’ और ‘भ्रष्टाचार बंद करो’ जैसे नारे लगाते रहे।

प्रदर्शन के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल के अध्यक्ष हेमन्त नन्दन ओझा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को श्रमिकों, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि श्रमिक और किसान विरोधी नीतियों को वापस नहीं लिया गया तो व्यापक जन लामबंदी के जरिए आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

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रिपोर्ट: उमेश पाण्डेय

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