
Pratapgarh News:बारिश से पहले नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर नगर निगम की ओर से किए गए बड़े-बड़े दावों की सोमवार को हुई बारिश ने पोल खोल दी। कुछ ही समय की बारिश के बाद शहर की कई गलियां और प्रमुख सड़कें पानी में डूब गईं।
हालात ऐसे रहे कि लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जलभराव के कारण सबसे अधिक परेशानी आम लोगों को उठानी पड़ी। कई इलाकों में सड़कें और गलियां तालाब जैसी नजर आईं। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले नालों की सफाई, जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और जलभराव वाले स्थानों को चिह्नित कर स्थायी समाधान का दावा किया जाता है, लेकिन बारिश होते ही व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ जाती है।
विधायक आवास के गेट तक पहुंचा पानी जलभराव की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहर उत्तरी के विधायक हर्ष वर्धन के रामबाग स्थित आवास के गेट तक भी पानी भर गया। जब शहर के जनप्रतिनिधियों के आवास के आसपास तक जलभराव की स्थिति बन रही है, तो आम नागरिकों की परेशानी का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। हर वर्ष मानसून में यही स्थिति दोहराई जाती है। बारिश से पहले सफाई अभियान चलाने और जलनिकासी के इंतजाम बेहतर करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर नजर नहीं आता। सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार विभाग कब तक अस्थायी इंतजामों के भरोसे इस समस्या को टालता रहेगा?
दावों से नहीं, स्थायी समाधान से मिलेगी राहत
जनता अब संबंधित विभाग के अधिकारियों से सीधे सवाल कर रही है आखिर इस समस्या से स्थायी समाधान कब मिलेगा? लोगों का कहना है कि जलभराव के बाद पानी निकालने की कवायद करने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे बारिश का पानी सड़कों और गलियों में जमा ही न हो। सोमवार को हुई बारिश ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि शहर को सिर्फ दावों और कागजी तैयारियों की नहीं, बल्कि प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था की जरूरत है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस बार भी जलभराव को महज बारिश की समस्या मानकर छोड़ देते हैं या फिर इसका स्थायी समाधान निकालने की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं।
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