Tamil Nadu Politics:“सनातन को खत्म करने” वाले बयान से मचा सियासी तूफान, बीजेपी ने दी ‘भीषण दंड’ की चेतावनी

तमिलनाडु विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन के बयान पर भड़की बीजेपी, अमित मालवीय बोले- आस्था पर हमला बर्दाश्त नहीं

Tamil Nadu Politics:तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर ‘सनातन’ को लेकर विवाद गहरा गया है। डीएमके नेता और तमिलनाडु सरकार में मंत्री Udhayanidhi Stalin के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख Amit Malviya ने कहा कि लाखों लोगों की आस्था का अपमान करना राजनीतिक साहस नहीं बल्कि अहंकार है।

दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा में बोलते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि “सनातन का समूल नाश होना चाहिए।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और बीजेपी ने इसे हिंदू आस्था पर हमला बताया है।


अमित मालवीय बोले- ‘इस बार ईश्वरीय दंड अत्यंत भीषण होगा’

बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछली बार जब उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही थी, तब अदालतों ने इसे ‘हेट स्पीच’ माना था और जनता ने उनकी पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया था।

उन्होंने आगे लिखा कि इस बार भले ही उन्हें विधानसभा की कानूनी सुरक्षा प्राप्त हो, लेकिन आस्था का अपमान करने वालों को उसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं। मालवीय ने कहा कि “लाखों लोगों की आस्था का मजाक उड़ाना राजनीतिक बहादुरी नहीं, बल्कि कोरा अहंकार है। इस बार ईश्वरीय दंड अत्यंत भीषण होगा।”

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विधानसभा में दिया गया बयान

मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर टिप्पणी की। उस समय मुख्यमंत्री M. K. Stalin भी सदन में मौजूद थे। विपक्ष ने इस बयान को लेकर तीखी आपत्ति दर्ज कराई है।


2023 में भी दिया था विवादित बयान

यह पहला मौका नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर विवादित टिप्पणी की हो। इससे पहले वर्ष 2023 में भी उन्होंने एक कार्यक्रम में सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से की थी।

उन्होंने कहा था कि “सनातन धर्म का सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि इसे खत्म करना चाहिए।” उस बयान के बाद देशभर में भारी राजनीतिक विवाद हुआ था और बीजेपी ने कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किए थे।


क्या बढ़ेगा राजनीतिक टकराव?

उदयनिधि स्टालिन के नए बयान के बाद एक बार फिर दक्षिण भारत की राजनीति में वैचारिक टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। बीजेपी इसे हिंदू आस्था का अपमान बता रही है, जबकि डीएमके लगातार सामाजिक न्याय और समानता के मुद्दे पर अपनी विचारधारा को सामने रखती रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा बहस का विषय बन सकता है।

Written By: Ekta verma

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