
UP Politcs : बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अपनी रणनीति में बदलाव के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। हाथरस के सादाबाद में बीएसपी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद का भाषण पार्टी की नई राजनीतिक दिशा की झलक देता है। करीब 57 मिनट के भाषण में आकाश आनंद ने बेरोजगारी, शिक्षा, सरकारी भर्ती, पेपर लीक और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर बीजेपी सरकार को घेरा। साथ ही समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहकर उन्होंने युवा मतदाताओं को साधने की कोशिश की।
30 वर्षीय आकाश आनंद की आक्रामक और संवादात्मक शैली बीएसपी की पारंपरिक राजनीति से अलग नजर आई। रोजगार और सरकारी नौकरियों जैसे मुद्दों को प्रमुखता देकर पार्टी उस युवा वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रिया और बेरोजगारी से जुड़े सवालों को लेकर परेशान है। भीड़ के साथ सवाल-जवाब का तरीका भी बीएसपी की पुरानी चुनावी शैली से अलग दिखाई दिया।
आकाश आनंद के सामने दलित वोट बैंक बचाने की चुनौती
बीएसपी की सबसे बड़ी चुनौती अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को दोबारा मजबूत करना है। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में दलित मतदाताओं के एक हिस्से का झुकाव बीजेपी, समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी की ओर देखने को मिला है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर आजाद की सक्रिय राजनीति ने बीएसपी के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है।
ऐसे में आकाश आनंद के लिए सिर्फ दलित युवाओं को पार्टी से जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें दलित आधार को मजबूत करने के साथ गैर-दलित और युवा मतदाताओं तक भी बीएसपी की पहुंच बढ़ानी होगी।
2007 के ‘सर्वजन’ फॉर्मूले की वापसी?
सादाबाद से ब्राह्मण चेहरे डॉ. अविन शर्मा को उम्मीदवार बनाया जाना बीएसपी के व्यापक सामाजिक समीकरण की ओर संकेत करता है। ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम, किसान और युवा मतदाताओं को एक साथ जोड़ने की कोशिश 2007 के बीएसपी के ‘सर्वजन’ प्रयोग की याद दिलाती है।
2007 में मायावती के नेतृत्व में बीएसपी ने सामाजिक समीकरणों के सहारे पूर्ण बहुमत हासिल किया था। हालांकि 2027 का उत्तर प्रदेश 2007 से काफी अलग है। बीजेपी का दलितों में प्रभाव, समाजवादी पार्टी की पीडीए रणनीति और चंद्रशेखर आजाद की बढ़ती सक्रियता बीएसपी के सामने कई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी करती है।
भाषण से आगे संगठन मजबूत करना होगा
आकाश आनंद की रणनीति की असली परीक्षा चुनावी मंच पर नहीं, बल्कि संगठन और वोट में होगी। ‘अंकल’ पॉलिटिक्स के जरिए युवा नेतृत्व की छवि बनाने की कोशिश तभी सफल मानी जाएगी, जब यह रणनीति बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और युवाओं को पार्टी से जोड़ने में कामयाब हो।
2027 के विधानसभा चुनाव में आकाश आनंद के सामने चुनौती सिर्फ अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर निशाना साधने की नहीं है। उन्हें यह साबित करना होगा कि युवा भाषा, आक्रामक तेवर और नए सामाजिक समीकरण मिलकर बीएसपी के बिखरे जनाधार को दोबारा एकजुट कर सकते हैं। सादाबाद की रैली इस रणनीति की शुरुआत है या सिर्फ चुनावी संदेश, इसका फैसला 2027 का चुनाव करेगा।



