
Uttar Pradesh Election News: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची से जुड़ी बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद चुनाव विभाग में हलचल मच गई है। जांच में 10 हजार से अधिक एंट्री बिना जरूरी आवेदन के ऑनलाइन किए जाने का मामला सामने आया है। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने पूरे प्रदेश में ऐसी एंट्री की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला समाजवादी पार्टी की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में एक मतदाता के पहचान पत्र पर नाम और पिता के नाम में बदलाव का आरोप लगाया गया था। शुरुआती जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद संबंधित मतदाता सूची की विस्तृत जांच की गई।
बिना फॉर्म-8 के बदली गईं जानकारियां
मतदाता सूची में नाम, पता या अन्य विवरण में बदलाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-8 भरना होता है। इसके साथ जरूरी दस्तावेज भी जमा करने पड़ते हैं। लेकिन पीलीभीत में जांच के दौरान 10 हजार से अधिक एंट्री बिना आवश्यक आवेदन के ऑनलाइन किए जाने की बात सामने आई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इसे महज गलती नहीं, बल्कि अपराध के तौर पर देखा जाना चाहिए।
दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी जांच के दायरे में
दी गई जानकारी के मुताबिक, 31 मई से 31 अगस्त के बीच हुई एंट्री की जांच में दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी सामने आई है। संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की गई है।
इन कर्मचारियों को मतदाता सूची से जुड़े काम से हटा दिया गया है। इसके अलावा, वीआरसी ऑपरेटरों की सेवाएं समाप्त करने के लिए प्रस्ताव मांगे जाने की जानकारी भी दी गई है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
किन कानूनों के तहत हो रही कार्रवाई?
इस मामले में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 30 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, आरोपों की अंतिम स्थिति और आगे की कानूनी प्रक्रिया जांच तथा संबंधित प्राधिकरणों के निर्णय पर निर्भर करेगी।
पूरे उत्तर प्रदेश में जांच के आदेश
पीलीभीत में मामला सामने आने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की एंट्री की जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कहीं दूसरे जिलों में भी बिना फॉर्म-8 और जरूरी दस्तावेजों के मतदाताओं के विवरण में बदलाव तो नहीं किया गया।
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इस कदम का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी की जांच करना और नियमों के उल्लंघन के मामलों में जिम्मेदार लोगों की पहचान करना है।
मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल
मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें किसी भी तरह का अनधिकृत बदलाव मतदाताओं के रिकॉर्ड की शुद्धता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना और हर बदलाव का उचित रिकॉर्ड रखना जरूरी है।
पीलीभीत का मामला सामने आने के बाद अब दूसरे जिलों की जांच पर भी नजर रहेगी। प्रदेशव्यापी जांच में क्या सामने आता है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।



