
New Delhi News-नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से उत्पन्न संकट के बीच भारत ने मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजकर पड़ोसी देश के साथ खड़े होने का संदेश दिया है। भारत सरकार की ओर से राहत सामग्री और जीवन रक्षक दवाओं की पहली खेप नेपाल भेजे जाने के बाद दूसरी खेप भी वायुसेना के विशेष विमान से रवाना की गई।
आपदा की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने उच्चस्तरीय बैठक कर नेपाल में राहत एवं बचाव कार्यों तथा वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि विदेश सचिव, विदेश मंत्रालय की टीम तथा काठमांडू और बीजिंग में भारतीय राजदूतों के साथ स्थिति पर चर्चा की गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कुशलक्षेम की जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय विभिन्न संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और परियोजना अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। साथ ही नेपाली अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग किया जा रहा है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के संबंधित मंत्रियों को भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री सौंपी। दूसरी खेप में आपदा राहत सामग्री, दवाएं और खाद्य पैकेट शामिल बताए गए हैं। दूतावास के अधिकारी नेपाल में रह रहे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए लगातार सक्रिय हैं और आवश्यक सहायता के लिए आपात संपर्क व्यवस्था भी की गई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को नेपाल में बचाया गया है। नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए विदेश मंत्रालय में विशेष नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है।
भारत की ओर से की गई त्वरित सहायता दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग और पड़ोसी प्रथम नीति को दर्शाती है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भारत पहले भी नेपाल को राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग देता रहा है। मौजूदा संकट में भी भारत ने नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखते हुए आवश्यक सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
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रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी



