
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर में हुए डबल मर्डर और सुसाइड केस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई नए सवाल सामने आ रहे हैं। एसबीआई कर्मचारी मानस बाजपेयी ने कथित तौर पर अपनी पत्नी दिव्या और बहन तूलिका की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुदकुशी कर ली थी। अब फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच में हथियारों को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है, जिसने पुलिस की जांच को नई दिशा दे दी है।
तीन पिस्टल मिलीं, लेकिन वारदात में चली सिर्फ एक
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से तीन पिस्टल बरामद की थीं। साथ ही 15 जिंदा कारतूस और तीन खोखे भी मिले। शुरुआती फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच में पता चला है कि तीनों मौतों में सिर्फ एक पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था।
यही बात अब पुलिस के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गई है। अगर वारदात में केवल एक हथियार इस्तेमाल हुआ, तो बाकी दो पिस्टल मानस के पास कहां से आईं? पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन हथियारों को किसने उपलब्ध कराया था और क्या इनके पीछे कोई अन्य कनेक्शन भी है।
बैंक कर्मचारी के पास तीन हथियार क्यों थे?
मानस बाजपेयी एसबीआई में कर्मचारी था। ऐसे में उसके पास तीन पिस्टल और बड़ी संख्या में कारतूस मिलने से जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये हथियार कब और कैसे खरीदे गए।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या मानस इन हथियारों को लंबे समय से अपने पास रखे हुए था या घटना से पहले ही उन्हें हासिल किया गया था। हथियारों की बैलिस्टिक रिपोर्ट और उनके स्रोत से जुड़े सुराग पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
मानस का लॉक iPhone बना जांच का सबसे अहम सुराग
इस पूरे मामले में मानस का निजी iPhone पुलिस के लिए सबसे अहम डिजिटल सबूत माना जा रहा है। पुलिस को दो मोबाइल फोन मिले हैं। इनमें से एक बैंक का आधिकारिक फोन बताया गया है, जबकि दूसरा मानस का निजी iPhone है।
iPhone लॉक होने के कारण पुलिस फिलहाल उसके डेटा तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच टीम मानस के दोस्तों और रिश्तेदारों से पूछताछ कर रही है, ताकि फोन का पासकोड या उससे जुड़ी कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सके।
फोन अनलॉक होने के बाद पुलिस को मानस की हालिया बातचीत, संपर्कों और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
iPhone से खुल सकते हैं ये बड़े राज
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले मानस की आखिरी बातचीत किससे हुई थी। इसके अलावा हथियारों की खरीद, किसी व्यक्ति से विवाद, आर्थिक लेनदेन या किसी अन्य दबाव से जुड़े सुराग भी फोन से मिल सकते हैं।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वारदात के पीछे मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी या किसी तरह का दबाव ही कारण था। इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
सुसाइड नोट नहीं मिला, WhatsApp Status से भी सुराग की तलाश
पुलिस को पूरे घर की तलाशी के बावजूद कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि, जांच में यह बात सामने आई है कि घटना से पहले मानस ने WhatsApp पर एक स्टेटस लगाया था।
अब पुलिस इस स्टेटस के साथ-साथ उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या मानस ने अपने कदम की कोई वजह डिजिटल माध्यम से बताने की कोशिश की थी।
अब हथियार और डिजिटल डेटा पर टिकी जांच
लखनऊ पुलिस के सामने फिलहाल दो बड़े सवाल हैं—तीन पिस्टल मानस तक कैसे पहुंचीं और घटना के पीछे असली वजह क्या थी? इन दोनों सवालों के जवाब तलाशने में बैलिस्टिक रिपोर्ट और मानस का iPhone महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल पुलिस फॉरेंसिक साक्ष्यों, मोबाइल डेटा, हथियारों की जांच और पूछताछ के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही है। iPhone का डेटा रिकवर होने और हथियारों के स्रोत का पता चलने के बाद इस डबल मर्डर-सुसाइड केस की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।



