New Delhi News –INDIA गठबंधन के मार्च पर अभिजीत दीपके की टिप्पणी, बोले- जंतर-मंतर विरोध की भावना का प्रतीक

New Delhi News – Abhijit Dipke’s remarks on the INDIA alliance’s march; says Jantar Mantar is a symbol of the spirit of protest.

New Delhi News –मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से जुड़े मुद्दों को लेकर INDIA गठबंधन के नेताओं ने सोमवार, 12 अक्टूबर को दिल्ली में मार्च निकाला। इस दौरान विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग से जुड़े मामलों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। मार्च पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर को विरोध की भावना का प्रतीक बताया।

अभिजीत दीपके ने कहा कि जंतर-मंतर केवल एक जगह नहीं है, बल्कि यह विरोध की ऐसी भावना है, जिसे कोई कभी नहीं छीन सकता। उनका यह बयान जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित किए जाने की चर्चा के बीच सामने आया।

19 विपक्षी दलों के नेता मार्च में हुए शामिल

दिल्ली में आयोजित इस मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत 19 दलों के नेताओं की भागीदारी भी बताई गई।

विपक्षी नेताओं ने बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च शुरू किया। इससे पहले नेता कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से बसों के जरिए बाराखंबा रोड पहुंचे थे। वहां एकत्र होने के बाद उन्होंने पैदल मार्च किया। इस दौरान छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा भी राहुल गांधी और अन्य नेताओं के साथ नजर आईं।

पुलिस ने भगवान दास रोड पर रोका मार्च

सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ रहे INDIA गठबंधन के नेताओं को पुलिस ने भगवान दास रोड पर बैरिकेड लगाकर रोक दिया। घटनाक्रम के दौरान रास्ते में दो स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारी पहले बैरिकेड से आगे बढ़े, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के नजदीक लगाए गए दूसरे बैरिकेड पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

मार्च के दौरान विपक्षी दलों के कुछ नेता ट्रक पर सवार भी दिखाई दिए। इस घटनाक्रम के चलते इलाके में राजनीतिक गतिविधियां चर्चा का विषय बनी रहीं।

चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार समेत दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों को प्रतिवादी बनाया गया है। राहुल गांधी सहित 11 याचिकाकर्ताओं के नाम भी इसमें शामिल बताए गए हैं।

विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया से संबंधित चिंताओं को न्यायालय के सामने रखने की कोशिश की है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।

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