Monsoon Session 2026: संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है और इसके हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। एक ओर विपक्ष महंगाई, नीट पेपर लीक, विपक्षी दलों में कथित तोड़-फोड़, राम मंदिर चढ़ावा चोरी और सूखे जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुका है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार अपने लंबित विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह सत्र केवल राजनीतिक टकराव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई ऐसे विधेयकों पर भी फैसला हो सकता है जिनका देश की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। पश्चिम बंगाल और असम में हालिया राजनीतिक सफलता तथा बदले हुए संसदीय समीकरणों ने सरकार का आत्मविश्वास बढ़ाया है।
परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर सरकार का फोकस
सरकार की प्राथमिकताओं में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक प्रमुख हैं। बताया जा रहा है कि इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार ने सहयोगी दलों और कुछ विपक्षी दलों से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई एनडीए मंत्रियों की बैठक में विभिन्न नेताओं को विपक्षी दलों से संवाद की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बजट सत्र में पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण सरकार इन विधेयकों को पारित नहीं करा सकी थी। इसे मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका माना गया था। इसके बाद से सरकार दोनों सदनों में आवश्यक संख्या बल जुटाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।
डीएमके समेत कई दलों से बातचीत
सूत्रों के अनुसार सरकार दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए डीएमके समेत कई क्षेत्रीय दलों से बातचीत कर रही है। दक्षिण भारत के राज्यों की मुख्य चिंता परिसीमन के बाद संसद में उनके प्रतिनिधित्व को लेकर रही है।
सरकार इस आशंका को दूर करने के लिए एक नया फार्मूला तैयार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 किए जाने का प्रावधान शामिल किया जा सकता है। इनमें करीब 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को मिलने का प्रस्ताव है।
दक्षिण भारत की हिस्सेदारी बरकरार रखने की कोशिश
सरकार का दावा है कि सीटों की संख्या बढ़ने के बावजूद दक्षिण भारतीय राज्यों की संसद में हिस्सेदारी कम नहीं होगी। प्रस्तावित मॉडल के तहत तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों की सीटों में वृद्धि होगी, जबकि उनका प्रतिशत प्रतिनिधित्व लगभग मौजूदा स्तर पर बना रहेगा।
गृह मंत्री अमित शाह पहले भी लोकसभा में आश्वस्त कर चुके हैं कि परिसीमन के बाद किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा और सभी क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को संतुलित रखा जाएगा।
विपक्ष के हमलों का सामना करेगी सरकार
मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और विभिन्न प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांग सकते हैं।
हालांकि सरकार को उम्मीद है कि कई क्षेत्रीय दल उसके प्रमुख विधेयकों का समर्थन कर सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बदले हुए गठबंधन समीकरण सरकार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
विवादित प्रस्तावों पर फिलहाल ब्रेक
सूत्रों के मुताबिक सरकार फिलहाल उन विवादास्पद प्रस्तावों को आगे नहीं बढ़ाना चाहती जिनका विपक्ष जोरदार विरोध कर रहा है। इसी वजह से हिरासत से जुड़े एक चर्चित संविधान संशोधन प्रस्ताव और ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे मुद्दों पर इस सत्र में आगे बढ़ने की संभावना कम मानी जा रही है।
ऐसे में संसद का मॉनसून सत्र 2026 केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि सरकार अपने बड़े सुधारवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने में कितनी सफल रहती है और विपक्ष उसके सामने कितनी प्रभावी चुनौती पेश कर पाता है।



