
Maharashtra: महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने राज्य में धर्मांतरण से जुड़े मामलों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार की ओर से जारी राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ 28 अगस्त 2026 यानी रक्षा बंधन के दिन से लागू होगा।
यह कानून जबरन, धोखे, दबाव, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, मिथ्या प्रस्तुतीकरण या विवाह के जरिए कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन को दंडनीय अपराध बनाता है। कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे अपराधों को गैर-जमानती भी बनाया गया है।
सभी धर्मों पर लागू होगा कानून
महाराष्ट्र सरकार के अनुसार नया कानून किसी एक धर्म को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है, बल्कि यह राज्य में सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होगा।
कानून का उद्देश्य बल, धोखाधड़ी, प्रलोभन या किसी अन्य अनुचित तरीके से कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है। विवाह के जरिए धोखे से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन को भी कानून के दायरे में लाया गया है।
धर्म बदलने से 60 दिन पहले देनी होगी सूचना
नए कानून में स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया तय की गई है। यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी दूसरे धर्म को अपनाना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले संबंधित प्राधिकारी को आवेदन देकर इसकी जानकारी देनी होगी।
यानी धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी रखने के लिए पहले से सूचना देना जरूरी होगा।
बच्चों के धर्म को लेकर भी खास प्रावधान
कानून में अंतरधार्मिक विवाह या रिश्ते से जुड़े बच्चों के धर्म को लेकर भी प्रावधान किया गया है।
इसके अनुसार, यदि किसी गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के बाद हुए विवाह या रिश्ते से बच्चा पैदा होता है, तो बच्चे का धर्म वही माना जाएगा, जो उसकी मां विवाह या रिश्ते से पहले मानती थी।
यह प्रावधान कानून के महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है, क्योंकि इसमें धर्म परिवर्तन के बाद परिवार और बच्चों की धार्मिक पहचान से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया है।
28 अगस्त से पूरे महाराष्ट्र में लागू
महाराष्ट्र सरकार की राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक राज्यपाल के आदेश के तहत महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 (महा. 47 ऑफ 2026) को लागू करने के लिए 28 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।
इसका मतलब है कि रक्षा बंधन के दिन से महाराष्ट्र में धर्मांतरण से जुड़े नए कानूनी प्रावधान प्रभावी हो जाएंगे।
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जबरन धर्मांतरण पर कसेगा कानूनी शिकंजा
नए कानून के लागू होने के बाद बल, दबाव, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन या मिथ्या जानकारी के जरिए धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
विवाह से जुड़े छल या धोखे के जरिए कराए गए धर्म परिवर्तन को भी अपराध माना गया है। ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले को राज्य में धर्मांतरण के मामलों पर नियंत्रण और कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।



