
Madan Mitra Left TMC: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और कमरहटी से विधायक मदन मित्रा ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल होने का फैसला भी किया है। इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
सभी पदों से दिया इस्तीफा
मदन मित्रा लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते रहे हैं। वह पार्टी के महासचिव, विधानसभा में चीफ व्हिप और दमदम-बारानगर संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। इस्तीफे के साथ उन्होंने इन सभी पदों से खुद को अलग कर लिया।
ED समन के बाद लिया फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगर निकाय भर्ती मामले में मदन मित्रा के परिवार के कुछ सदस्यों को समन भेजा है। हालांकि, मदन मित्रा ने सार्वजनिक रूप से अपने इस्तीफे का कारण विस्तार से नहीं बताया है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं।
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ममता के करीबी नेताओं में थी गिनती
मदन मित्रा उन नेताओं में शामिल रहे हैं, जिन्हें ममता बनर्जी का करीबी माना जाता था। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के दौरान भी वह कई अहम बैठकों में शामिल होते रहे। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना तृणमूल कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
कांग्रेस से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
मदन मित्रा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वर्ष 1998 में जब ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की, तब वह उनके साथ जुड़ गए। वर्ष 2011 में पहली बार विधायक बने और बाद के चुनावों में भी अपनी सीट बरकरार रखने में सफल रहे।
बंगाल की राजनीति पर रहेगी नजर
हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में लगातार दल-बदल और आंतरिक खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में मदन मित्रा का यह फैसला आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक तस्वीर को किस तरह प्रभावित करेगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।



