
Gen Z Conclave : धार्मिक नगरी काशी में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रीय चेतना को लेकर तीन दिवसीय संस्कृति संसद का आयोजन 3 से 5 नवंबर 2026 तक किया जाएगा। इस आयोजन में देशभर से करीब 3000 संत और 7000 से अधिक युवा शामिल होंगे। इसके अलावा देश-विदेश के विद्वान, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, कलाकार और संस्कृति प्रेमी भी हिस्सा लेंगे। संस्कृति संसद में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने और वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक पहचान मजबूत करने जैसे विषयों पर मंथन होगा।
आयोजन की जानकारी रविवार को सिगरा स्थित सत कैवल्य ज्ञान पीठ (गुजराती धर्मशाला) में आयोजित पत्रकारवार्ता में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने दी। उन्होंने बताया कि संस्कृति संसद संतों, विद्वानों, कलाकारों और युवाओं को एक साझा मंच प्रदान करेगी, जहां भारतीय संस्कृति के विभिन्न आयामों और मौजूदा चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
2014 से हर दो साल में हो रहा आयोजन
स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि वर्ष 2014 से प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित हो रही संस्कृति संसद अब भारतीय सांस्कृतिक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बन चुकी है। इसका उद्देश्य केवल परंपराओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में भारतीय संस्कृति के मूल्यों को समझना और उन्हें नई पीढ़ी से जोड़ना बेहद जरूरी है।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदगुरु अविचल देवाचार्यजी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की समग्र पद्धति है। इसमें परिवार, समाज, प्रकृति, मानवता और सभी जीवों के प्रति संवेदनशीलता का भाव शामिल है। उन्होंने कहा कि संस्कृति संसद के माध्यम से युवाओं को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
संयुक्त मंत्री महामंडलेश्वर मनमोहन दास राधे-रोधे बाबा ने कहा कि भारतीय संस्कृति का आधार आध्यात्मिकता, सेवा, त्याग, करुणा और सामाजिक समरसता है। आयोजन में परंपरा और आधुनिकता के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित करने पर विशेष जोर रहेगा।
छह प्रमुख कार्यक्रम होंगे संस्कृति संसद का हिस्सा
संस्कृति संसद 2026 को व्यापक सांस्कृतिक आयोजन के रूप में तैयार किया गया है। इसके तहत छह प्रमुख कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें मुख्य संस्कृति संसद, Gen Z Conclave, संस्कृति उत्सव, राष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी और रंगोली व बाल चित्रकला प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में होंगे मुख्य सत्र
रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेंटर के मुख्य सभागार में तीनों दिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक मुख्य सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें देशभर से आए संत, धर्माचार्य, शिक्षाविद, वैज्ञानिक और विषय विशेषज्ञ भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक चुनौतियों पर विचार रखेंगे।
Gen Z Conclave में युवा उठाएंगे सांस्कृतिक मुद्दे
इस बार संस्कृति संसद का विशेष आकर्षण Gen Z Conclave होगा। इसका आयोजन प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अलग सेमिनार हॉल में किया जाएगा। इसमें देशभर से आए युवाओं को भारतीय संस्कृति और समकालीन सामाजिक विषयों पर अपनी बात रखने तथा विशेषज्ञों से सवाल पूछने का अवसर मिलेगा।
आयोजकों के अनुसार, इस कॉन्क्लेव में करीब 90 प्रतिशत वक्ता युवा पीढ़ी से होंगे, जबकि 10 प्रतिशत विशेषज्ञ और अनुभवी मार्गदर्शक शामिल रहेंगे। इसका उद्देश्य युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय विचारधारा से जोड़ना है।
शाम को होगा संस्कृति उत्सव, दिखेगी भारत की कला और विरासत
तीनों दिन शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक संस्कृति उत्सव आयोजित किया जाएगा। इसमें देश की लोक एवं शास्त्रीय कलाओं, संगीत, नृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारत की विविधतापूर्ण विरासत प्रदर्शित की जाएगी। इसमें युवा कलाकारों और दर्शकों की भागीदारी पर विशेष जोर रहेगा।
इसके अलावा राष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इनमें भारतीय सभ्यता, ऐतिहासिक धरोहरों, तीर्थस्थलों, आध्यात्मिक परंपराओं और लोकजीवन की झलक देखने को मिलेगी। बच्चों और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए रंगोली और बाल चित्रकला प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी।
कई धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं का मिलेगा सहयोग
गंगा महासभा के तत्वावधान में आयोजित होने वाली संस्कृति संसद को अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री काशी विद्वत परिषद सहित विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं का सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त है।
आयोजकों का कहना है कि संस्कृति संसद का उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक विरासत को केवल अतीत की धरोहर के रूप में देखने के बजाय उसे वर्तमान की जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों से जोड़ना है। संतों, विद्वानों, वैज्ञानिकों, कलाकारों और युवाओं के साझा विमर्श के जरिए काशी से राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक चेतना का संदेश देने की तैयारी है।



