Karnaprayag Assembly: उत्तराखंड की कर्णप्रयाग विधानसभा सीट एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। चमोली जिले में स्थित यह सीट गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण इलाकों में गिनी जाती है। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर यहां सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं।
इतिहास में बीजेपी का पलड़ा भारी
राज्य गठन के बाद इस सीट पर अब तक पांच विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें चार बार भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली है, जबकि कांग्रेस सिर्फ एक बार जीत दर्ज कर सकी है। यही वजह है कि कर्णप्रयाग को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है।
2022 के चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार अनिल नौटियाल ने जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश नेगी को पीछे छोड़ते हुए सीट अपने नाम की थी। इससे पहले भी पार्टी यहां लगातार मजबूत प्रदर्शन करती रही है।
कांग्रेस तलाश रही मजबूत चेहरा
हालांकि, कांग्रेस इस बार मुकाबले को दिलचस्प बनाने की कोशिश में जुटी है। पार्टी के भीतर कई नेताओं के नाम संभावित उम्मीदवारों के रूप में चर्चा में हैं। स्थानीय संगठन भी सीट पर बेहतर रणनीति तैयार करने में लगा हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस सही उम्मीदवार और मजबूत चुनावी अभियान के साथ उतरती है तो मुकाबला कड़ा हो सकता है।
बीजेपी को सत्ता विरोधी लहर की चुनौती?
बीजेपी के लिए सबसे बड़ा सवाल सत्ता विरोधी माहौल से निपटना होगा। हालांकि मौजूदा विधायक अनिल नौटियाल को संगठन और कार्यकर्ताओं का समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। ऐसे में पार्टी एक बार फिर उन पर भरोसा जता सकती है।
क्या कहते हैं चुनावी संकेत?
कर्णप्रयाग का चुनावी इतिहास बीजेपी के पक्ष में दिखाई देता है, लेकिन हर चुनाव अपने अलग मुद्दों और परिस्थितियों के साथ आता है। स्थानीय विकास, सड़क, रोजगार और पलायन जैसे मुद्दे 2027 के चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि बीजेपी अपनी जीत का सिलसिला जारी रखती है या कांग्रेस इस सीट पर वापसी कर नया राजनीतिक अध्याय लिखती है।
written by Siddhi Srivastava