
BRICS Summit 2026 : भारत और रूस के आर्थिक रिश्ते अब व्यापार से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक सहयोग के नए दौर में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत-रूस आर्थिक संबंधों को अब “प्रोटोकॉल से उत्पादन और व्यापार से उद्योग” की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर और आपसी निवेश को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर काम कर रहे हैं।
भारत-रूस व्यापार में 40 अरब डॉलर बढ़ोतरी की जरूरत
भारत मंडपम में आयोजित ‘भारत-रूस बिजनेस फोरम 2026’ को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। हालांकि, इस व्यापार में और अधिक विविधता लाने तथा भारतीय MSME क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है।
गोयल के मुताबिक, मौजूदा स्तर से व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए अगले चार वर्षों में करीब 40 अरब डॉलर का अतिरिक्त व्यापार जोड़ना होगा। इसके लिए लगातार दोहरे अंकों में सालाना वृद्धि हासिल करना जरूरी होगा।
उन्होंने कहा कि भारत और रूस को अपने आर्थिक रिश्तों को केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित रखने के बजाय उत्पादन, निवेश और संयुक्त औद्योगिक परियोजनाओं की दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए।
भारतीय MSME के लिए रूस में बढ़ेंगे अवसर
पीयूष गोयल ने भारत के MSME सेक्टर के लिए रूस के साथ व्यापार और औद्योगिक सहयोग में कई नए अवसरों का उल्लेख किया। इनमें प्रमुख रूप से फार्मास्युटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, ट्रैक्टर और कृषि उपकरण, केमिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीकी और औद्योगिक उत्पाद शामिल हैं।
भारत की छोटी और मध्यम कंपनियों को रूसी बाजार से जोड़ने के साथ-साथ संयुक्त उत्पादन और निवेश को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
भुगतान और कनेक्टिविटी पर भी फोकस
भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय निवेश ढांचे, राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान व्यवस्था और परिवहन कनेक्टिविटी को मजबूत करने की जरूरत बताई गई।
गोयल ने इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक मैरीटाइम कॉरिडोर के जरिए दोनों देशों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने पर जोर दिया।
इन परिवहन मार्गों से माल की आवाजाही तेज करने और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रूस के साथ संयुक्त औद्योगिक परियोजनाओं पर जोर
रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव ने कहा कि भारत में रूसी कंपनियों की संयुक्त औद्योगिक परियोजनाएं पहले से बढ़ रही हैं।
उन्होंने भारत में इलेक्ट्रिकल उपकरण, सिंथेटिक रबर और पॉलीमर कंपोजिट मटीरियल से जुड़ी रूसी मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाओं का उल्लेख किया।
फार्मास्युटिकल क्षेत्र को भी भारत-रूस औद्योगिक सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया गया। दोनों देशों के बीच संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं के साथ-साथ रूस के विमानों की भारत में आपूर्ति, असेंबली और रखरखाव को लेकर भी बातचीत चल रही है।
AI और माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स समेत इन क्षेत्रों में बढ़ सकता है सहयोग
रूस के मंत्री ने भविष्य में सहयोग के लिए कई उभरते क्षेत्रों की पहचान की। इनमें रेयर और क्रिटिकल अर्थ मेटल्स, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्ट, अनमैन्ड सिस्टम्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्मार्ट सिटी सॉल्यूशंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं।
इससे संकेत मिलता है कि भारत-रूस आर्थिक साझेदारी अब पारंपरिक ऊर्जा और रक्षा सहयोग से आगे बढ़कर नई तकनीक और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग तक विस्तार करने की दिशा में है।
भारत की डिजिटल ताकत और रूस की तकनीकी क्षमता का मेल
ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल में भारत के प्रतिनिधि और राज्यसभा सांसद*विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि भारत-रूस की दशकों पुरानी साझेदारी अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को रूस की वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञता के साथ जोड़कर MSME, किसानों, स्टार्टअप और उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
साहनी ने भारत-रूस सहयोग का दायरा खाद्य सुरक्षा, कृषि, उर्वरक, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, नागरिक परमाणु ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकों तक बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
BRICS के जरिए भी मजबूत होगी भारत-रूस साझेदारी
भारत में आयोजित होने वाला BRICS Summit 2026 भी भारत-रूस आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा।
इसकी थीम “मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण” रखी गई है।
भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे आपसी भरोसे को अब खाद्य, ईंधन, उर्वरक, ऊर्जा, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग, वित्त और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग में बदलने पर जोर दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, भारत-रूस की आर्थिक साझेदारी अब पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर निवेश, संयुक्त उत्पादन, MSME, डिजिटल तकनीक और उन्नत विनिर्माण पर केंद्रित होती दिखाई दे रही है। 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करना दोनों देशों के लिए इस नई आर्थिक साझेदारी की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।



