Jagannath Rath Yatra Controversy: ISKCON पर भड़के पुरी के गजपति महाराजा, कहा- भक्तों को किया जा रहा गुमराह

रथयात्रा की तिथियों को लेकर पुरी मंदिर प्रशासन और ISKCON के बीच बढ़ा विवाद, ओडिशा ISKCON ने मांगी माफी।

Jagannath Rath Yatra Controversy: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को लेकर पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और ISKCON (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) के बीच विवाद गहरा गया है। विवाद की वजह ओडिशा से बाहर भारत और विदेशों में अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा आयोजित किए जाने को लेकर है। पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देब ने इस्कॉन पर धार्मिक परंपराओं की अनदेखी करने और श्रद्धालुओं को गुमराह करने का आरोप लगाया है।

क्या है पूरा विवाद?

पुरी मंदिर प्रशासन का कहना है कि हिंदू पंचांग और श्रीजगन्नाथ मंदिर की परंपरा के अनुसार रथयात्रा का आयोजन केवल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाले नौ दिवसीय उत्सव के दौरान ही किया जाना चाहिए। आरोप है कि ISKCON देश और विदेश में अपनी सुविधा के अनुसार वर्ष के अलग-अलग समय पर रथयात्राएं आयोजित करता है, जो पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं है।

गजपति महाराजा ने क्या कहा?

पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देब ने कहा कि रथयात्रा की तिथि और परंपरा का पालन करना धार्मिक दृष्टि से अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय पर रथयात्रा निकालने से श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मुद्दे पर ISKCON की शीर्ष संस्था गवर्निंग बॉडी कमीशन (GBC) को पहले भी लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद विदेशों में असमय रथयात्राएं आयोजित की जा रही हैं।

प्रेस विज्ञप्ति से बढ़ा विवाद

विवाद तब और बढ़ गया जब मुंबई स्थित ISKCON की जुहू शाखा की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया कि इस विषय पर हुई चर्चा में ISKCON के विद्वानों ने पुरी के विद्वानों को शास्त्रार्थ में पराजित कर दिया था।

इस दावे को गजपति महाराजा ने पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों के बीच केवल विचार-विमर्श हुआ था, किसी प्रकार का शास्त्रार्थ या जीत-हार जैसी कोई स्थिति नहीं थी।

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ओडिशा ISKCON ने मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद ISKCON की ओडिशा इकाई ने सफाई देते हुए गजपति महाराजा से खेद व्यक्त किया है। ओडिशा ISKCON के क्षेत्रीय सचिव बनमाली दास ने कहा कि यदि संस्था के किसी कदम से महाराजा की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो वे इसके लिए दिल से क्षमा चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि ओडिशा में ISKCON हमेशा पुरी की परंपराओं और निर्धारित तिथियों का पालन करता है। हालांकि, विदेशों में आयोजित होने वाली रथयात्राओं का संचालन स्थानीय इकाइयों द्वारा किया जाता है, जिन पर ओडिशा इकाई का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं होता।

यूएई में भी तय तिथि पर होगी रथयात्रा

बनमाली दास ने बताया कि इस वर्ष संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी रथयात्रा का आयोजन 16 जुलाई को ही किया जाएगा, जो भारत में निर्धारित पारंपरिक तिथि के अनुरूप है।

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