सेमीफाइनल में दिखाया दमदार खेल
सेमीफाइनल मुकाबले की शुरुआत क्विंसी ने शानदार अंदाज में की। उन्होंने पहला सेट 12-7 से जीतकर बढ़त बना ली थी और फाइनल में पहुंचने की मजबूत दावेदार नजर आ रही थीं। लेकिन इसके बाद इंडोनेशिया की सुमाया ने शानदार वापसी की। दूसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जिसे सुमाया ने 12-9 से अपने नाम किया। तीसरे और निर्णायक सेट में भी उन्होंने अपनी लय बरकरार रखी और क्विंसी को 12-7 से हराकर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया।
कांस्य पदक जीतने का सुनहरा मौका
सेमीफाइनल में हार के बावजूद क्विंसी डिसूजा के लिए एशियन गेम्स अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। अब वह कांस्य पदक मुकाबले में लेबनान की कमार डंडाल से भिड़ेंगी। इस मुकाबले में जीत उन्हें एशियन गेम्स में भारत के लिए टेकबॉल का ऐतिहासिक पदक दिला सकती है। भारतीय खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि क्विंसी इस अवसर को भुनाकर पोडियम पर जगह बनाने में सफल रहेंगी।
शानदार सफर ने खींचा ध्यान
क्विंसी ने इस टूर्नामेंट में कई मजबूत खिलाड़ियों को हराकर सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। उन्होंने शुरुआती दौर में दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल जापान की यिउन साकामोटो को मात देकर बड़ा उलटफेर किया था। इसके बाद कंबोडिया की खिलाड़ी के खिलाफ भी उन्होंने प्रभावशाली प्रदर्शन किया। लगातार जीत के दम पर उन्होंने साबित किया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत दावेदार हैं।
फुटबॉल से टेकबॉल तक का प्रेरणादायक सफर
मुंबई की रहने वाली 24 वर्षीय क्विंसी डिसूजा पेशे से टेस्ट इंजीनियर हैं। खेलों के प्रति उनका लगाव बचपन से रहा है और वह अंडर-19 स्तर पर फुटबॉल भी खेल चुकी हैं। फुटबॉल के महान खिलाड़ी रोनाल्डिन्हो को सोशल मीडिया पर टेकबॉल खेलते देखने के बाद उनकी इस खेल में रुचि बढ़ी। उन्होंने मेहनत और समर्पण के बल पर खुद को टेकबॉल में स्थापित किया और अब एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
पहली बार एशियन गेम्स में शामिल हुआ टेकबॉल
टेकबॉल को पहली बार एशियन गेम्स का हिस्सा बनाया गया है। फुटबॉल और टेबल टेनिस के मिश्रण से विकसित इस खेल ने हाल के वर्षों में तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। ऐसे में क्विंसी डिसूजा का प्रदर्शन भारतीय खेलों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। भले ही वह फाइनल में जगह नहीं बना सकीं, लेकिन उनका संघर्ष और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन सकती हैं।
अब ब्रॉन्ज मेडल पर भारत की नजर
भारतीय खेल प्रेमियों की निगाहें अब क्विंसी डिसूजा के अगले मुकाबले पर टिकी हैं। यदि वह कांस्य पदक मुकाबले में जीत दर्ज करती हैं, तो यह न केवल उनके करियर की बड़ी उपलब्धि होगी बल्कि एशियन गेम्स में टेकबॉल के इतिहास में भारत के लिए एक यादगार पल भी साबित होगा।