
IIT Seats 2026: देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में प्रवेश पाने का सपना देखने वाले लाखों इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों के लिए एक बेहद राहत भरी और सकारात्मक खबर सामने आई है। जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) और ज्वाइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी (JoSAA) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि साल 2022 से 2026 के बीच देशभर के आईआईटी संस्थानों में कुल सीटों की क्षमता में 13.4 प्रतिशत का महत्वपूर्ण इजाफा दर्ज किया गया है। इन चार वर्षों के अंतराल में आईआईटी की कुल स्वीकृत सीटें 16,598 से बढ़कर 18,826 के आंकड़े तक पहुंच गई हैं।
4 सालों में जुड़ीं 2,228 नई सीटें, 2026 में दिखा सबसे बड़ा उछाल
ज्वाइंट इंप्लीमेंटेशन कमेटी के आंकड़ों के मुताबिक, आईआईटी संस्थानों में यह विस्तार मुख्य रूप से नए दौर के तकनीकी पाठ्यक्रमों (जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और रोबोटिक्स) की शुरुआत और फीमेल सुपरन्यूमरेरी सीट आवंटन प्रणाली के सुचारू रूप से लागू होने के कारण संभव हुआ है।
सीटों में वृद्धि का साल-दर-साल ब्योरा देखें तो 2022 में उपलब्ध 16,598 सीटों के मुकाबले वर्ष 2023 में 787 नई सीटें जोड़ी गईं, जिससे आंकड़ा 17,385 हो गया। इसके बाद वर्ष 2024 में 375 सीटें जोड़कर क्षमता 17,760 की गई, जबकि 2025 में 400 अतिरिक्त सीटों के साथ यह बढ़कर 18,160 तक पहुंची। वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026 में सबसे बड़ा उछाल देखा गया, जब एक ही वर्ष में 666 नई सीटें शामिल की गईं और कुल क्षमता 18,826 के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे राहत की बात यह रही कि यह विस्तार ‘जेंडर न्यूट्रल’ पूल की सामान्य सीटों को प्रभावित किए बिना किया गया है, जिससे सभी वर्गों के मेधावी छात्रों के लिए अवसर बढ़े हैं।
महिला सुपरन्यूमरेरी सीटों में 141% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
आईआईटी परिसरों में लैंगिक अनुपात (Gender Diversity) को बेहतर बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में कम से कम 20 प्रतिशत महिला नामांकन का लक्ष्य तय किया गया था। इस नीति के तहत बनाई गई ‘फीमेल ओनली सुपरन्यूमरेरी’ सीटों की संख्या में पिछले 4 सालों में 141 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जहाँ वर्ष 2022 में फीमेल सुपरन्यूमरेरी सीटों की कुल संख्या 1,567 थी, वहीं 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 3,776 पर पहुंच गया। यह सीटें मूल जेंडर न्यूट्रल सीटों से अलग (अतिरिक्त) तैयार की जाती हैं, ताकि लड़कों की सामान्य सीटों पर इसका कोई प्रतिकूल असर न पड़े। वर्ष 2024 के बाद से यह प्रणाली पूरी तरह से स्थिर हो गई है, जहाँ कुल रिपोर्ट की गई सीट क्षमता में महिलाओं की सुपरन्यूमरेरी सीटों की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत पर बनी हुई है।
कुल आवंटन में महिलाओं की हिस्सेदारी में मामूली सुधार
हालांकि सुपरन्यूमरेरी सीटों की संख्या 141 प्रतिशत बढ़ी है, लेकिन काउंसलिंग के दौरान कुल सीट आवंटन में छात्राओं के समग्र प्रतिशत में बहुत मामूली बदलाव देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार:
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वर्ष 2022: कुल 16,635 आवंटित सीटों में से 3,310 सीटें छात्राओं को मिलीं, जो कुल आवंटन का 19.9% था।
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वर्ष 2026: कुल 18,861 आवंटित सीटों में से 3,814 सीटें छात्राओं को प्राप्त हुईं, जो कुल आवंटन का 20.22% है।
यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि आईआईटी में प्रवेश पाने वाली छात्राओं की वास्तविक संख्या में तो बढ़ोतरी हुई है, लेकिन कुल आवंटन में उनका अनुपात पांचवें हिस्से (लगभग 20%) के आसपास ही स्थिर बना हुआ है।
सीट कैपेसिटी और फाइनल अलॉटमेंट का अंतर
आंकड़ों का विश्लेषण करते समय विशेषज्ञ यह ध्यान रखने की सलाह देते हैं कि ‘स्वीकृत सीट क्षमता’ (Seat Capacity) और ‘अंतिम आवंटन’ (Final Allotment) दो अलग-अलग पैमाने हैं।
उदाहरण के तौर पर, 2026 में आईआईटी की कुल स्वीकृत सीट क्षमता 18,826 थी, जबकि JoSAA काउंसलिंग के अंतिम दौर के बाद कुल 18,861 सीटें आवंटित की गईं। यह अतिरिक्त अंतर कुछ विशेष सुपरन्यूमरेरी श्रेणियों के तहत किए गए अतिरिक्त आवंटन को दर्शाता है, जिसे स्थायी स्वीकृत क्षमता में वृद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। नए आंकड़े साफ करते हैं कि आईआईटी परिसरों में बुनियादी ढांचे और सीटों के विस्तार से देश भर के इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों के लिए आईआईटी का सपना पूरा करना अब पहले से अधिक सुलभ हुआ है।
written by Siddhi Srivastava



