Bihar: बिहार बाढ़ पर तेजस्वी यादव का सरकार पर हमला, बोले- 50 लाख लोग प्रभावित, राहत में नहीं दिख रही गंभीरता

बिहार में बाढ़ और सूखे की स्थिति को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता, किसानों के नुकसान का सर्वे और केंद्र से अतिरिक्त मदद की मांग की।

Bihar: बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य और केंद्र सरकार के राहत इंतजामों पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ से करीब 50 लाख लोग प्रभावित हैं और कई परिवारों को अभी भी पर्याप्त मदद नहीं मिल पाई है।

हालांकि, सरकारी पक्ष की ओर से भी राहत कार्यों के आंकड़े सामने आए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बिहार दौरे के दौरान बताया गया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता के तौर पर 7,000 रुपये दिए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार 8.27 लाख से अधिक परिवारों को डीबीटी के जरिए करीब 579.23 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 15 हजार रुपये की मांग

तेजस्वी यादव ने बाढ़ और सूखे से प्रभावित परिवारों को तत्काल 15 हजार रुपये की सहायता देने की मांग की। उनका कहना है कि जिन परिवारों के घरों में पानी घुस गया या जिनका सामान और घर बर्बाद हुआ है, उनके सामने राहत शिविरों से बाहर निकलने के बाद बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।

उन्होंने सामुदायिक रसोई और राहत शिविरों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। तेजस्वी का आरोप है कि कुछ जगहों पर राहत की व्यवस्था कुछ ही दिनों में बंद हो गई। दूसरी ओर, उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार राज्य में राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई के जरिए राहत अभियान चलाया जा रहा है।

पीएम मोदी के जन्मदिन पर दीप जलाने को लेकर निशाना

तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर आयोजित दीप जलाने के कार्यक्रम को भी बाढ़ राहत से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, तब सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल ऐसे कार्यक्रमों में किया जा रहा है।

रिपोर्टों के मुताबिक, तेजस्वी ने इस कार्यक्रम पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने का आरोप लगाया है। यह आंकड़ा उनके राजनीतिक आरोप के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि इसके बजाय यही पैसा बाढ़ प्रभावित परिवारों की तत्काल मदद में इस्तेमाल किया जाना चाहिए था।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्र पर भी सवाल

तेजस्वी ने बिहार से आने वाले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री है, राज्य से कई केंद्रीय मंत्री और बड़ी संख्या में एनडीए सांसद हैं, फिर भी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे का आग्रह क्यों नहीं किया गया।

उन्होंने केंद्र सरकार से बाढ़ को लेकर विशेष सहायता और नुकसान के आकलन की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की। इससे पहले केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार नुकसान के आकलन के आधार पर बिहार को हर संभव सहायता देगी।

फसल नुकसान और मुआवजे का मुद्दा

तेजस्वी यादव ने बाढ़ और सूखे दोनों के कारण किसानों को हुए नुकसान का सर्वे कराने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि बड़ी मात्रा में धान, मक्का, सब्जी और केले की फसल प्रभावित हुई है और किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए।

केंद्रीय टीम के दौरे के दौरान भी फसलों और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का आकलन किया गया था। शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के कई इलाकों में फसलों, घरों और सड़कों को हुए नुकसान का जायजा लिया था।

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पीएम केयर्स फंड को लेकर भी उठाया सवाल

तेजस्वी ने प्रधानमंत्री राहत कोष और पीएम केयर्स फंड के जरिए बिहार को सहायता दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र से पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने के बावजूद बिहार को अतिरिक्त आर्थिक मदद क्यों नहीं दी जा रही है।

बिहार में बाढ़ के साथ कई इलाकों में कम बारिश की समस्या भी सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून से 16 सितंबर के बीच राज्य में सामान्य से 36 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई थी। ऐसे में राज्य के सामने बाढ़ और सूखे की दोहरी चुनौती बनी हुई है।

बिहार में बाढ़ राहत को लेकर अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ केंद्र और राज्य सरकार की ओर से नुकसान के आकलन और मुआवजे की प्रक्रिया पर भी नजर बनी हुई है।

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