
National News: NEET री-एग्जाम से पहले पेपर लीक और ऑनलाइन नकल पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को दिल्ली हाईकोर्ट ने सही ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 69A के तहत सरकार के पास सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय हित में ऐसे कदम उठाने का अधिकार है।
सरकार ने 16 जून से 22 जून तक टेलीग्राम की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया था, ताकि 21 जून को होने वाली NEET री-एग्जाम प्रक्रिया को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाया जा सके। इस फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष को स्वीकार किया और बैन को बरकरार रखा।
सुनवाई में क्या हुआ?
जस्टिस तेजस कारिया की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार के पास आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत आवश्यक परिस्थितियों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने की वैधानिक शक्ति है। केंद्र सरकार ने अदालत में दलील दी कि NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा से पहले टेलीग्राम के दुरुपयोग की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सरकार ने कहा कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए जाते, तो पेपर लीक और संगठित नकल जैसी घटनाएं दोबारा सामने आ सकती हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
टेलीग्राम ने कोर्ट में क्या कहा?
टेलीग्राम की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने अदालत को बताया कि कंपनी ने NEET से जुड़े 900 से अधिक संदिग्ध लिंक एक घंटे के भीतर हटाए और AI व मैनुअल मॉडरेशन के जरिए आपत्तिजनक सामग्री पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
कंपनी का तर्क था कि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करने के बजाय केवल संदिग्ध चैनलों और ग्रुप्स पर कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि अदालत ने सरकार की सुरक्षा संबंधी चिंताओं और परीक्षा की संवेदनशीलता को भी गंभीरता से लिया।
सरकार ने बताए पांच बड़े कारण
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने टेलीग्राम को लेकर कई अहम दावे किए। सरकार के अनुसार एक टेलीग्राम अकाउंट से कई बॉट बनाए जा सकते हैं, जिनका दुरुपयोग बड़े पैमाने पर जानकारी फैलाने में होता है। इसके अलावा प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पेपर लीक, साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य अवैध गतिविधियों में होने की आशंका जताई गई।
सरकार ने यह भी कहा कि टेलीग्राम की क्लाउड आधारित संरचना और बड़ी संख्या में यूजर्स को तेजी से माइग्रेट करने की क्षमता जांच एजेंसियों के लिए चुनौती पैदा कर सकती है। इसी वजह से अस्थायी प्रतिबंध को आवश्यक कदम बताया गया।
15 करोड़ यूजर्स पर असर, लेकिन परीक्षा सुरक्षा को प्राथमिकता
सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि कुछ लोगों की गतिविधियों के कारण करोड़ों यूजर्स को असुविधा क्यों झेलनी पड़े। इसके बावजूद अदालत ने माना कि परीक्षा की निष्पक्षता और सार्वजनिक हित को देखते हुए सीमित अवधि का प्रतिबंध उचित माना जा सकता है।
कब हट सकता है बैन?
फिलहाल टेलीग्राम पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहने की संभावना है। यदि परिस्थितियां सामान्य रहीं और परीक्षा प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई, तो इसके बाद सेवाएं बहाल की जा सकती हैं। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित अधिकारियों की समीक्षा पर निर्भर करेगा।
NEET री-एग्जाम को लेकर सरकार की सख्ती और हाईकोर्ट की मंजूरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रशासन तकनीकी प्लेटफॉर्म्स पर भी कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
Written By: Ekta Verma



