
CAPF Act 2026: CAPF Act 2026 केंद्र सरकार ने CAPF (General Administration) Act 2026 को लागू कर दिया है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक नया कानून 8 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गया है। इसके साथ ही CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB में ग्रुप-A जनरल ड्यूटी समेत अन्य अधिकारियों की भर्ती, प्रमोशन, डेपुटेशन और सेवा शर्तों के लिए एक साझा कानूनी ढांचा लागू हो गया है।
यह कानून ऐसे समय लागू हुआ है, जब CAPF अधिकारियों की ओर से इसकी वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। संसद ने इस कानून को अप्रैल 2026 में पारित किया था।
IPS अधिकारियों के डेपुटेशन का क्या है प्रावधान?
नए कानून में CAPF के वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति यानी डेपुटेशन का प्रावधान रखा गया है। इसके तहत -IG स्तर के 50% पद IPS अधिकारियों की डेपुटेशन से भरे जाएंगे। ADG स्तर के कम से कम 67% पद डेपुटेशन से भरे जाने का प्रावधान है। SDG और DG स्तर के पद केवल डेपुटेशन के जरिए भरे जाएंगे।
इन प्रावधानों को लेकर CAPF के कैडर अधिकारियों में असंतोष है। उनका कहना है कि वरिष्ठ पदों पर डेपुटेशन का बड़ा हिस्सा रहने से उनके प्रमोशन और करियर में आगे बढ़ने के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
किन 5 केंद्रीय सुरक्षा बलों पर लागू होगा कानून?
CAPF General Administration Act 2026 के दायरे में पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल शामिल हैं –
1. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)
2. सीमा सुरक्षा बल (BSF)
3. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)
4. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP)
5. सशस्त्र सीमा बल (SSB)
इन सभी बलों में ग्रुप-A जनरल ड्यूटी और अन्य अधिकारियों की भर्ती, सेवा शर्तों, प्रमोशन और डेपुटेशन से जुड़े नियम अब इस कानून के तहत संचालित होंगे।
कैडर अफसरों ने क्यों जताई आपत्ति?
CAPF के कैडर अधिकारियों का तर्क है कि वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की डेपुटेशन से नियुक्ति का बड़ा हिस्सा रहने पर उन्हें पदोन्नति के पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे। इसी मुद्दे को लेकर अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
अधिकारियों ने केंद्र से सुप्रीम कोर्ट के मई 2025 के फैसले को लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि कोर्ट ने CAPF में IG स्तर तक IPS डेपुटेशन को चरणबद्ध तरीके से कम करने की बात कही थी, ताकि कैडर अधिकारियों को अधिक अवसर मिल सकें।
सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले में क्या कहा गया था?
CAPF में IPS डेपुटेशन का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा है। मई 2025 के फैसले में कोर्ट ने CAPF में IG तक के स्तर पर IPS अधिकारियों की डेपुटेशन को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने इसके लिए अधिकतम दो साल की समय-सीमा तय की थी। साथ ही कैडर रिव्यू के निर्देश भी दिए गए थे। अदालत का मानना था कि वरिष्ठ पदों पर कैडर अधिकारियों को पर्याप्त अवसर मिलने से उनके करियर और बलों के मनोबल पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
बाद में केंद्र की ओर से फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में खारिज कर दिया था।
सरकार ने क्यों बनाया नया CAPF कानून?
सरकार के मुताबिक CAPF की जिम्मेदारियां और ऑपरेशनल जरूरतें लगातार बढ़ी हैं। पांचों बलों के लिए अलग-अलग समय में अलग सेवा नियम विकसित हुए, जिसके कारण प्रशासन और सेवा मामलों में एकरूपता की कमी रही।
कानून के उद्देश्य और कारणों में कहा गया है कि अलग-अलग नियमों की वजह से सेवा संबंधी कई विवाद और मुकदमे सामने आए। नए कानून का उद्देश्य इन पांचों बलों के अधिकारियों के लिए एक समान कानूनी और प्रशासनिक ढांचा तैयार करना है।
इसके तहत सरकार को अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया, डेपुटेशन और सेवा शर्तों से संबंधित नियम निर्धारित करने का अधिकार भी मिलता है।
रिटायर्ड CAPF अफसरों ने भी उठाया था मुद्दा
CAPF के रिटायर्ड अधिकारियों के एक समूह ने भी इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। समूह ने तत्कालीन गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। उनका कहना था कि CAPF की कमान व्यवस्था और वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति से जुड़े बदलावों का असर अधिकारियों के मनोबल और बलों की संचालन क्षमता पर पड़ सकता है।
CAPF Act 2026 से क्या बदलेगा?
नए कानून के लागू होने के बाद पांचों CAPF में अधिकारियों की भर्ती, प्रमोशन, डेपुटेशन और सेवा शर्तों को एक साझा कानूनी ढांचे के तहत लाया गया है। हालांकि, IPS डेपुटेशन के प्रावधान और कैडर अधिकारियों की आपत्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती अभी महत्वपूर्ण बनी हुई है।



